अईजीएनटीयू में भारतीय शिक्षा मंडल (आरएसएस) के कार्यक्रम का हुआ समापन


लाखो का स्वाहा कर पुनः कुलपति बनने का कर रहे है जुगाड़ ??


भोपाल । इंदिरा गांधी नेशनल ट्राईबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक में आरएसएस के भारतीय शिक्षा मंडल का तीन दिवसी पूर्ण कालीन एवं अखिल भारतीय स्तर के वर्ग का समापन शनिवार को हुआ। इस वर्ग में भारत वर्ष से लगभग ढाई सौ से अधिक पूर्ण कालीन कार्यकर्ता एवं विभिन्न क्षेत्रों में कार्यकरनें वाले कार्यकार्ता  सामिल हुये। कार्यशाला एवं वर्ग में आरएसएस के संगठन मंत्री मुकुल कामेतकर के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष भी शिरकत किये। विश्वविद्यालय की राशी से आरएसएस के वर्ग का संचालन विश्वविद्यालय की इस नई नीती से प्रशसन की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।


विश्वविद्यालय के पैसों से हो रहें संघ के कार्यक्रम
कुलपति बने रहनें की जुगत में आईजीएनटीयू के कुलपती द्वारा राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ को लुभानें में कोई कसर नहीं छोड रहें है। विश्वविद्यालय के छात्रों के विकाश और छात्रों के शिक्षा हित में आये मत/बजट को अपनें पर्सनल लाभ के लिये उपयोग में ला रहें है। कुर्सी बचानें के लिये पिछलें आठ महीनों में कई बडे आरएसएस के कार्यकार्ता को विश्वविद्यालय भ्रमण के लिये निमंत्रित किये गये। विश्वविद्यालय में छात्रों के अवकाश के बीच संघ की कार्यशाला का आयोजन किया गया। जहां संघ कार्यकर्ता और कार्यक्रम से जुडे लोगों के अलावा अन्य व्यक्तियों का आना जाना प्रतिबंधित था। सवाल उठता है की विश्वविद्यालय में कार्यशला में ऐसा क्या था की विश्वद्यिलय के छात्र छात्रा  और अन्य सदस्यों का कार्यशला में शामिल होने की अनुमती नही दी गई। कार्यक्रम के बाद वृक्षा रोपण करते मुकुल कामेतकर विश्वविद्यालय में नजर आयें। कार्यक्रम में प्रवेश की अनुमति न होने से कार्यक्रम की तस्वीर उपलब्ध नही हो पाई।


 विश्व विद्यालय में अनूठा प्रयोग
कुलपती अपना पूर्ण कार्यकार्य के बाद असंवैधानिक रूप से पद को सुशोभित कर रहें है अपनी पकड के माध्यम से कुर्सी में अपनी पकड मजबूत करानें का प्रयाश लगातार किया जा रहा है।  विश्वविद्यालय के पैसों से आरएसएस के कार्यशाला का आयोजन यह भारत में अलग ही तरह का प्रयोग पर्सनल लाभ के लिये किया गया। जिससे संघ को खुश कर अपने पद को बनाये रखने का अनुठे प्रयोग ने विश्वविद्यालय और छात्र के शिक्षा की गुणवत्ता विकाश में आये पैसों का हास है। जिससे विश्वविद्यालय में शिक्षा ले रहें छात्रों का भविष्य पूर्णः अंधकारमय होता दिख रहा है। विश्वविद्यालय की बजट राशी का उपयोग संघ जैसे कार्यक्रमों में उपयोग से शिक्षा का स्तर गिरता जायेगा।


नैतिकता और आदर्श का हास
आरएसएस जो  सहयोग, सदभाव  और अपने आर्दश एवं नौतिकता के लिये जाना जाता है वह सुख भोगी ,सुविधा भोगी कार्यक्रमों को विश्वविद्यालय में आयोजित कर अपनी शाख खोती जा रही है। मानव संसाधन एवं विकाश मंत्रालय के संज्ञान में एसे कार्यक्रमों का संचालन होना अपने आप में आर्श्चय की बात है। मंत्रालय के संज्ञान में के बिना एसे कार्यक्रम का संचालन संम्भव नही है।

दो विभागों  की राशि का उपयोग
मिली जानकारी के अनुसार दो विभागों के शासकीय मद से कार्यशला का आयोजन किया गया। जिसमें योगा दिवश बनाने के लिये मनिस्ट्री आफ योगा विभाग ने जो राशी को योगा विभाग को दी गई थी उस राशी का प्रयोग कार्यशाला के आयोजन में उपयोग लाया गया साथ ही लुप्त प्रयभाष विभाग  जिसमें आदिवासियों के भाषा के संरक्षण के लिये किया गया था , उसके बजट को कार्यशला आयोजन मे उपयोग में लाया गया। छात्र हितों के लिये प्रशासन से मिले अनुदान को संघ के कार्यक्रमों में उपयोग में लाना अपने आप मे वित्तीय अनियमित्ता को दर्शाता है।


कुर्सी का मोह नें आरएसएस से जोडा
खबरों की मानें तो कट्टीमनी आए दिन कानपुर, दिल्ली, भोपाल सहित एसी जगहों पर चक्कर लगा रहे हैं जहां से उन्हें ट्राईबल यूनिवर्सिटी में पुनः कुलपति बनने का आश्वासन मिल रहा है। विश्वविद्यालय के साथ राजनीतिक गलियारों में यह भी खबर तेजी से फैल रही है की कट्टी मनी के द्वारा एड़ी - चोटी का जोर लगाकर राजनीतिक बलबूते पर विश्वविद्यालय में दोबारा पदस्थ होने की कवायत लगाई जा रही है। इसे देखकर यही लगता है कि ’जहां भी बने जैसा भी बने बने पर जरूर’ इसी तर्ज पर कुलपति आए दिन संघ के बड़े पदाधिकारियों से मिलने की खबर आती रहती है। बीते महीनों में संघ के बड़े पदाधिकारी भी विश्वविद्यालय में भ्रमण के लिए आए हुए थे। जिससे यह आकलन कर देखा जा रहा है की कुलपति के द्वारा अपनें दुबारा विश्व विद्यालय में पदस्थापना के लिये पदाधिकारियों को विश्वविद्यालय बुलाया जा रहा है। इसे राजनीतिक नजरिया से देखा जाए तो कुलपति पद के लिए पूरी जुगत लगाई जा रही है