अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले ही एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा लंगर सामग्री लेकर जा रहे ट्रकों को रोका जा रहा है। उन्हें सड़क किनारे लगवाकर खड़ा कर दिया गया है। वहीं ट्रकों को रोके जाने की वजह भी नहीं बताई जा रही।बालटाल और पहलगाम में लगाए जाने वाले लंगर की सामग्री से भरे ट्रकों को जम्मू-कश्मीर पुलिस 20 से 22 घंटे के लिए जगह-जगह पर रोक रही है। ट्रकों को रोका भी ऐसी जगह जा रहा है, जहां खाने को तो दूर पीने को पानी भी नहीं है।

तर्क दिया जा रहा है कि अधिकारियों के अगले आदेश तक उन्हें भेजा नहीं जा सकता। लंगर की सामग्री से भरे ट्रकों को सुबह पांच बजे से 10 बजे तक छोड़ने के आदेश हैं। श्री अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले ही पूरे देश के अलग-अलग हिस्सों से विभिन्न संस्थाओं द्वारा बालटाल और पहलगाम में लंगर लगाए जाते है।

इस बार श्राइन बोर्ड की तरफ से फैसला किया गया था कि 21 जून से पहले कोई भी लंगर वाली सामग्री लेकर टनल पार नहीं कर पाएगा। भंडारा वालों के विरोध पर श्राइन बोर्ड ने 18 जून के बाद कभी भी सामान लेकर पहुंचने के लिए कह दिया। श्राइन बोर्ड तो मान गया, लेकिन जम्मू-कश्मीर प्रशासन की तरफ से लंगर सामग्री लेकर जा रही गाड़ियों को रोका जा रहा है। 

 

राजस्थान के हनुमानगढ़ स्थित श्री बर्फानी सेवा समिति संस्था के प्रधान बलदेव राज अरोड़ा ने बताया कि वह सुबह 11 बजे ऊधमपुर बाईपास के पास पहुंच गए थे। वहां उन्हें जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुलाजिमों ने रोक लिया। उनसे पहले वहां कुछ और गाड़ियां भी खड़ी थीं। जब बात की गई तो पुलिस मुलाजिमों ने कह दिया कि गाड़ियां आगे नहीं जाएंगी।

उन्हें सोमवार की सुबह पांच और दस बजे के बीच में ही छोड़ा जाएगा। अरोड़ा ने आरोप लगाया कि लंगर सामग्री लेकर जाने वाले ट्रकों को जानबूझ कर ऐसी जगह रोका गया है, जहां न तो कुछ खाने को है और न ही पानी पीने को। उन्हें पानी भी करीब पांच किलोमीटर दूर से लाना पड़ा। इस समय लंगर सामग्री से भरी बीस से ऊपर गाड़ियां खड़ी हैं।

श्री अमरनाथ बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन के राजन गुप्ता ने कहा कि पिछली बार जब लंगर सामग्री लेकर जाने वाले ट्रकों को परेशान किया गया था तो प्रशासन से बात की गई थी। प्रशासन हर बार की तरह इस बार भी कई तरह के तर्क दे रहा है कि गाड़ियां क्यों रोकी गई हैं।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से मांग की है बिना वजह से लंगर सामग्री लेकर जाने वाले ट्रकों को परेशान न किया जाए। सुरक्षा कारणों से प्रशासन को गाड़ियां रोकनी भी पड़ रही है तो सीमित समय के लिए रोका जाए और ऐसी जगह रोका जाए, जहां पर सुविधाएं उपलब्ध हों।