आजकल मोबाइल की पहुंच बच्चों ओर किशोरों तक भी है और वह भी सेल्फी लेने लगे हैं। वहीं इससे लगातार हादसे के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में बच्चों को इस आदत से दूर रखना अभिभावकों का काम है। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार हम एक ऐसे युग में रहते हैं जहां मोबाइल फोन हमारे जीवन में प्रवेश कर चुका है और वास्तविक मानवीय संपर्क लगभग न के बराबर है  हालांकि प्रौद्योगिकी ने सभी के लिए जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ एक गंभीर समस्या भी है। पिछले दो वर्षो में दुनिया भर में सेल्फी का बुखार बढ़ा है। सेल्फी को दुनिया भर में बड़ी संख्या में मृत्यु दर और महत्वपूर्ण बीमारी से जोड़ा गया है। 
इस डिजिटल युग में, अच्छे स्वास्थ्य के लिए तकनीक का इस्तेमाल जरुरत से ज्यादा न हो। हम में से बहुत से लोग ऐसे उपकरणों के गुलाम बन गए हैं जो वास्तव में हमें फ्री टाइम देने और जीवन को बेहतर तरीके से अनुभव करने तथा लोगों के साथ अधिक समय बिताने के लिए बनाये गये थे। जब तक जल्द से जल्द एहतियाती उपाय नहीं किए जाते, यह लत लंबी अवधि में किसी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
मोबाइल फोन के अधिक उपयोग के कारण होने वाली समस्याओं को अभिभावक इस प्रकार रोकें। 
बच्चों को सोने से 30 मिनट पहले किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का उपयोग न करने दें ।
हर तीन महीने में सात दिन के लिए फेसबुक से दूर रखें। सप्ताह में एक बार, पूरे दिन के लिए सोशल मीडिया का उपयोग न करने दे।अपने मोबाइल फोन का उपयोग केवल तभी करें जब घर से बाहर हों। 
अपने मोबाइल टॉक टाइम को दिन में दो घंटे तक सीमित करें। अपने मोबाइल की बैटरी को दिन में एक से अधिक बार रिचार्ज न करें। मोबाइल भी अस्पताल में संक्रमण का एक स्रोत हो सकता है, इसलिए, इसे हर दिन कीटाणुरहित किया जाना चाहिए।