उदयपुर  । अयोध्या विवाद मामले में राजस्थान में जयपुर के बाद अब मेवाड़ के पूर्व राज परिवार ने भी कहा है कि वे श्रीराम के वंश के हैं। वे राम के बेटे लव के वंशज हैं। लव ने लव-कोटे (लाहौर) बसाया था। लव के वंशज कालांतर में आहाड़ यानी मेवाड़ आए और जहां सिसौदिया साम्राज्य की स्थापना की। इतिहासकारों ने भी कहा है कि मेवाड़ राजपरिवार के रीति-रिवाज, शिव उपासक और सूर्यवंशी होना भी श्रीराम के वंशज होने के प्रमाण हैं। महेन्द्र सिंह मेवाड़ ने कहा है कि हमारा राजघराना श्रीराम के पुत्र लव का वंशज है। मेवाड़ में उनकी 76 पीढिय़ों का इतिहास दर्ज है, जबकि राजघराने का इतिहास और भी पुराना है। मेवाड़ पूर्व राज परिवार के ही लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने भी कहा है कि हम लव के वंशज हैं। बता दें, अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। 9 अगस्त को कोर्ट ने रामलला के वकील से पूछा था- क्या भगवान राम का कोई वंशज अयोध्या या दुनिया में है? इस पर वकील ने कहा था- हमें जानकारी नहीं। हाल ही में दीया कुमारी ने जयपुर के पूर्व राज परिवार को श्रीराम पुत्र कुश का वंशज होने के प्रमाण प्रस्तुत किए हैं।  लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा है कि हम लव के वंशज हैं। कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक 'एनल्स एंड एंटीक्वीटीज ऑफ राजस्थानÓ में लिखा है- श्रीराम की राजधानी अयोध्या थी। उनके बेटे लव ने लव-कोटे (लाहौर) बसाया था। लव के वंशज कालांतर में गुजरात होते हुए आहाड़ यानी मेवाड़ में आए, जहां सिसौदिया साम्राज्य की स्थापना की। चित्तौड़ के बाद उदयपुर को भी राजधानी बनाया था। मेवाड़ का राज प्रतीक सूर्य रहा है। श्रीराम भी शिव उपासक थे और मेवाड़ राजपरिवार भी एकलिंगनाथ (शिवजी) का उपासक है। ये मेवाड़ राजपरिवार के सूर्यवंशी श्रीराम के वंशज होने के पुख्ता प्रमाण हैं।  महेन्द्र सिंह मेवाड़ बताते हैं कि मेवाड़ राजपरिवार भगवान राम के पुत्र लव का वंशज है। श्रीराम के वंशजों की वंशावली अयोध्या केस का मुद्दा ही नहीं है, फिर भी क्यों मांग रहे हैं? जयपुर राजघराने ने लगभग 25 साल पूर्व वंशावली दी उसका क्या हुआ? ये दोनों समानताएं श्रीराम के वंश में भी रही हैं। मेवाड़ राजपरिवार के सूर्य वंशी होने की वंशावली भी मौजूद है। श्रीराम के बड़े बेटे लव (पाटवी) ने लवकोटे (लाहौर) और कालांतर में  बप्पा रावल ने रावलपिंडी बसाया था, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। मेवाड़ का साम्राज्य पाकिस्तान तक था। चतुर सिंह बावजी ने चतुर चिंतामणि में भी महाराणा प्रताप को श्रीराम का पोता (वंशज) और रघुवंशी लिखा है। दिन पहले ही जयपुर के पूर्व राजघराने और राजसमंद से भाजपा सांसद दीया कुमारी ने खुद को राम का वंशज बताया था। राघव ने रविवार को अपने फेसबुक वाल पर वाल्मिकी रामायण का उल्लेख करते हुए यह दावेदारी पेश की है। राघव ने कहा कि लव और कुश राम तथा सीता के जुड़वां बेटे थे। कुश को दक्षिण कोसल प्रदेश (छत्तीसगढ़) में कुश और लव को उत्तर कोसल में अभिषेक किया गया। वाल्मीकि रामायण के पेज नंबर 1671 में उल्लेख किया गया है। कालिदास के रघुवंश के अनुसार राम ने अपने पुत्र लव को शरावती का और कुश को कुशावती का राज्य दिया था। शरावती को आज श्रावस्ती से जाना जाता है, जो राज्य उत्तर भारत में है। जबकि कुश का राज्य दक्षिण कोसल में है। कुश की राजधानी कुशावती आज के छत्तीसगढ़ में थी। यह भी उल्लेख है कि कुश को अयोध्या जाने के लिए विंध्याचल को पार करना पड़ता था। इससे साबित होता है कि उनका राज्य दक्षिण कोसल में ही था। राजा लव से राघव राजपूतों का जन्म हुआ, जिनमें बर्गुजर, जयास और सिकरवारों का वंश चला। जबकि कुश से कुशवाह (कछवाह) राजपूतों का वंश चला।