हरियाणा कांग्रेस (Congress) की कमान अपने हाथो में दिए जाने का इंतजार करते करके थक चुके भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) ने सियासी चौसर पर अपनी बाजी चल दी है. लंबे वक्त से उन्हें यकीन था कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें ही विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Elections 2019) की कमान सौंपेगा और सीएम पद का कंडीडेट घोषित करेगा. ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने बगावती तेवर दिखा दिया. यही नहीं रविवार को रोहतक (Rohtak ) में हुई परिवर्तन रैली में हुड्डा ने खुद को सीएम कंडीडेट घोषित करते हुए अपनी सरकार आने पर अलग-अलग समुदायों के चार उप मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान भी कर दिया.

हालांकि अब उनका असली निशाना तो जाट वोटर हैं, जो हरियाणा (Haryana Politics) में गैर जाट सीएम बनाने से नाखुश बताए जाते हैं. लोकसभा चुनाव में बीजेपी (BJP) अगर कहीं कमजोर थी तो जाटलैंड और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में. इस समय हरियाणा में जाट लीडर (Jat Leader) बनने का भरपूर स्पेस है.
अलग-अलग दलों में बंटे हुए हैं जाट

हरियाणा में जाटों की पार्टी कही जाने वाली इनेलो दो फाड़ होकर कमजोर हो चुकी है. ओम प्रकाश चौटाला और उनके बड़े अजय चौटाला जेल में हैं. इनेलो के अधिकांश विधायक बीजेपी के साथ आ चुके हैं. दुष्यंत चौटाला की जन नायक जनता पार्टी (जेजेपी) का अभी तक कोई जनाधार नहीं बन पाया है. एक और जाट नेता वीरेंद्र सिंह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री नहीं बनाए गए हैं.

बीजेपी ने जाट बहुल क्षेत्रों में गैर जाटों को लोकसभा का टिकट दिया और वो कामयाब रही. इस तरह विपक्ष के सारे जाट लीडर हार गए. लिहाजा हुड्डा को लगता है कि नाराज जाटों के लिए वे खुद को एक बड़े लीडर के तौर पर स्थापित कर सकते हैं. ये भी ध्यान रखने वाली बात है कि राज्य में अपने दस साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने जाटों को पूरी तवज्जो दी थी.
अब भी कांग्रेस के संदेश का हुड्डा को इंतजार!

हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा का कहना है कि हुड्डा का गेम प्लान यही है कि जाट वोटबैंक को साधा जाए. यह उनके लिए सबसे अच्छा मौका है, क्योंकि राजनीति में जाट हाशिए पर हैं और उनकी सिसायत करने वाले नेता आपसी जंग में उलझे हुए हैं. दूसरा वो भीड़ जुटाकर बीजेपी से अधिक कांग्रेस को संदेश देना चाहते हैं कि उनके पास लोग हैं. यह प्रेशर पॉलिटिक्स है. इसीलिए इस रैली में हुड्डा ने किसी भी कांग्रेस नेता की फोटो नहीं लगाई और आर्टिकल 370 हटाने का समर्थन किया.

हुड्डा को अब भी कांग्रेस से अपने लिए संदेश का इंतजार है. हालांकि धमीजा यह भी कहते हैं कि अगर हुड्डा खुद की पार्टी बनाते हैं तो कांग्रेस के कुछ विधायक उनका साथ छोड़ सकते हैं. ऐसे में उनके लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी. संगठन तो संगठन ही होता है.
बीजेपी के जाट लीडर

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गैर जाट सीएम बनने और जाट आरक्षण आंदोलन के बाद हरियाणा की जाट कम्युनिटी बीजेपी से नाराज है. खट्टर सरकार की इमेज शुरू से ही गैर जाट वाली बनी हुई है. इस समय जाट नौकरशाह हाशिए पर हैं. हालांकि बीजेपी इस इमेज को मिटाने की भी कोशिश करती रही है. इसलिए जाट समाज से आने वाले सुभाष बराला को प्रदेश अध्यक्ष बनाया हुआ है. कैप्टन अभिमन्यु और ओम प्रकाश धनकड़ के रूप में दो कैबिनेट मंत्री जाट समाज से हैं.