बरेली. उत्तर प्रदेश के बरेली (Bareilly) जिले में दशहरे के अवसर पर तीन तलाक (Triple Talaq) पीड़ित महिलाओं ने सामाजिक कुरीतियों के प्रतीक रूपी रावण (Ravana) का पुतला दहन किया. केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar Abbas Naqvi) की बहन और तीन तलाक पीड़ितों की आवाज बनी फरहत नक़वी ने मुस्लिम महिलाओं (Muslim Women) के साथ रावण का पुतला फूंका. ये पुतला मुस्लिम धर्म में व्याप्त बुराइयों और सामाजिक कुरीतियों का प्रतीक था. इस पुतले के दस सिर थे और सभी सिर को किसी न किसी बुराई का नाम दिया गया था. एक सिर तीन तलाक का था तो दूसरा हलाला का था. जबकि एक अन्य सिर बहु विवाह का था.
मंगलवार को विजयादशमी के दिन पूरे देश में रावण का बुराई रूपी पुतला फूंका गया. लेकिन कानपुर में लोगों ने रावण की पूजा की. दरअसल, कानपुर महानगर के बीचों-बीच स्थित कैलाश मंदिर परिसर में दशानन (रावण) का मंदिर है. वर्ष 1868 में इस मंदिर का निर्माण महाराज गुरु प्रसाद ने किया था. हर साल की तरह इस बार भी सुबह-सुबह इस मंदिर के पट खोले गए थे. इस मंदिर की विशेषता यह है कि ये पूरे साल में सिर्फ दशहरे के दिन ही खुलता है. दशहरे के दिन रावण की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है. इसके पीछे श्रद्धालुओं का तर्क है कि चूंकि रावण विद्वान और पराक्रमी था. उसे महाविद्याओं का पंडित भी कहा जाता है. इसलिए उसकी विद्वता और पराक्रम के गुणों की पूजा की जाती है. कुछ लोगों का यह भी मानना है कि दशहरे के दिन जो भी व्यक्ति रावण की पूजा करता है, उसे विद्या और पराक्रम दोनों एक साथ मिल जाता है.
रावण का फूंकते हैं पुतला
दशहरे पर रावण को उसके बुरे स्वरूप को याद कर पुतला फूंकने की परंपरा है. हिंदू धर्मग्रंथ के अनुसार, रावण के अंतिम समय में प्रभु श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा था, जाओ विश्व के महान पंडित का आशीर्वाद लो. उनके चरण स्पर्श कर ज्ञान लो. वह तो भगवान राम ही थे, जिन्होंने अपने शत्रु के प्रति भी आदर दिखाया था. उसके दुर्गुणों की वजह से उसका अंत किया पर उसकी विद्वता का भी मान रखा था. उसी परंपरा का निर्वहन इस बार भी दशहरे पर कानपुर के श्रद्धालुओं ने किया.