छत्तीसगढ़ की अंजली सिंह गौतम की सच्ची कहानी को एनसीईआरटी की किताब में शामिल कर लिया गया है.

छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के साथ-साथ कई बार बच्चे भी नक्सलियों से लोहा लेने में पीछे नहीं हटते. ये बात सुनकर भले ही अजीब लगे, लेकिन बस्तर का सच यही है.

नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा के नकुलनार में रहने वाली एक ऐसी ही लड़की की कहानी है, जिसने माओवादियों से मुकाबला करने के साथ-साथ अपने भाई की जान भी बचाई. नकुलनार की रहने वाली अंजली सिंह गौतम उस समय महज 14 साल की थी.

अपने गृहग्राम में रह रही अंजली के परिवार को 6 साल पहले एक रात में करीब 500 माओवादियों ने घेर लिया था. उस दौरान पूरे परिवार के साथ अंजली ने भी माओवादियों से संघर्ष किया.

अंजली के छोटे भाई पर माओवादियों ने कई गोलियां दागी थीं. ऐसे समय में भी अंजली ने अपना हौसला खोऐ बिना अपने भाई को कांधो में उठाया और उसे लेकर अस्पताल पहुंची.

घटना को पूरे छह से सात साल बीत चुके हैं. अंजली को इस बहादुरी के लिए देश में कई जगहों पर सम्मान भी मिला है.

राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित हुई अंजली की बहादुरी की कहानी को अब एनसीईआरटी ने अपनी पुस्तक में छापा है. यानि अब अंजली के बहादुरी के किस्से आने वाली पीढ़ियां पढ़ेंगी.

सीबीएसई ने सिलेबस में इसे शामिल कर लिया है. 6 साल पहले 500 से ज्यादा नक्सलियों ने उसे और उसके गांव को घेर लिया था और उसके मामा को उसकी आंखों के सामने मार डाला. तब अंजली ने अपने भाई की जान बचाई थी. इस दौरान नक्सलियों ने उस पर कई गोलियां भी दागी थीं.