राजस्थान में बारिश के कारण बिजली की खपत कम होने का असर कोटा थर्मल पर भी पड़ा है.

विंड एनर्जी से हो रहे उत्पादन को देखते हुए लोड डिस्पेच सेंटर ने बारह सौ चालीस मेगावाट की कुल क्षमता वाले कोटा थर्मल की पांच यूनिटों से विद्युत उत्पादन बंद करवा दिया है. इसमें दूसरी, तीसरी, चौथी, पांचवीं और सातवीं इकाई शामिल हैं. अभी प्लांट की मात्र छठी यूनिट से विद्युत उत्पादन किया जाता है और उससे एक सौ पिच्यासी मेगावाट का विद्युत उत्पादन हो रहा है. इसके अलावा पहली यूनिट का वार्षिक रख-रखाव चल रहा है. जिसकी मरम्मत का काम चार अगस्त तक पूरा होने की उम्मीद है.

उल्लेखनीय है कि भारत को साल 2019 तक किसी नए पावर प्लांट की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि देश में पहले से ही विद्युत उत्पादन की पर्याप्त क्षमता है. हाल ही सरकार के ताजा आकलन में यह बात कही गई है.

नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी की समीक्षा के लिए पावर मिनिस्ट्री ने जो आकलन किया है, उसके मुताबिक देश को अगले तीन वर्षों तक किसी नए पावर प्रोजेक्ट की जरूरत नहीं होगी. इस समीक्षा में कहा गया है कि मौजूदा प्लांट्स में उनकी पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं हो रहा है, कई यूनिट्स में काम ठप है और कई प्लांट्स अंडर-कंस्ट्रक्शन हैं. बता दें कि यह पॉलिसी साल 2005 में पॉलिसी इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के रोडमैप के रूप में जारी हुई थी. अब पावर सेक्टर में आए बदलावों को देखते हुए अब इसमें बदलाव किया जा रहा है.