लंदन। दुनिया भर में महिलाएं एक साल में पुरुषों की अपेक्षा औसतन 39 दिन अधिक काम करती हैं। हालांकि भारतीय महिलाएं इससे भी आगे हैं। एक नई रिपोर्ट में पता चला है कि पुरुष साथियों की अपेक्षा भारतीय महिलाएं एक साल में 50 दिन अधिक काम करती हैं।

हालांकि पुरुषों को महिलाओं की अपेक्षा 34 फीसद अधिक पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है। इतनी असमानता होने के बावजूद महिलाओं को घर का कामकाज, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल जैसे अवैतनिक काम भी करने पड़ते हैं।

द न्यू वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर की महिलाएं एक दिन में पुरुषों की तुलना में औसतन 50 मिनट अधिक काम करती हैं। महिला और पुरुष के बीच आर्थिक असमानता खत्म करने में अभी 170 साल लग सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं पर अवैतनिक कार्यों का भारी बोझ है।

रिपोर्ट की मानें तो दुनिया भर में सिर्फ छह देश हैं, जहां के पुरुष महिलाओं से अधिक काम करते हैं। इनमें विशेषतः उत्तरी यूरोप के तीन देश हैं, जहां पैरेंटल लीव (बच्चे के जन्म पर माता-पिता को छुट्टी) पुरुष और महिलाओं के बीच अपेक्षाकृत समान रूप से साझा की जाती है।

डब्ल्यूईएफ की डाटा एनालिस्ट वेसेलिना रतचेवा ने बीबीसी को बताया, "पैरेंटल लीव साझा करना अच्छा है, क्योंकि यह परिवारों को अपने जीवन की योजना बनाने, करियर के साथ बच्चे को जन्म देने के लिए खुद को तैयार तथा जिम्मेदारियों को साझा करने की अनुमति देता है।"

रिपोर्ट कहती है कि यदि अवैतनिक कार्यों को भी जोड़ लिया जाए तो महिलाएं एक साल में एक माह अधिक काम करती हैं। भारत, पुर्तगाल और एस्टोनिया की महिलाएं एक साल में पुरुषों की अपेक्षा 50 दिन अधिक काम करती हैं।