'दिल के जीते जीत है और दिल के हारे हार' यह बात मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले की छात्रा निधि गुप्ता ने सच कर दिखाई है. दोनों हाथ न होते हुए निधि ने पैरों की सहायता से पढ़-लिखकर डीसीए और आईटीआई की तालीम हासिल कर ली है. विश्व विकलांग दिवस पर आगे की स्लाइड में जानते है विकलांगों के लिए मिसाल बनी निधि गुप्ता की कहानी.

 

दरसअल, जिले के गोबरगांव की रहने वाली निधि गुप्ता को कुदरत ने हाथों से वंचित रखा है. इसके बाद भी निधि घर के सारे काम अपने पैरों से बखूबी करती है.

निधि, सुई में धागा डालने के बारीक काम से लेकर मोबाईल, लैपटॉप का संचालन भी पैरों से कर लेती है.

खास बात ये है जिंदगी से निधि ने जमकर मुकाबला किया और कभी हार नहीं मानी. निधि के परिजनों ने तंग हालात के चलते भी भरपूर साथ दिया. मन में कंप्यूटर इंजीनियर बनने का ज़ज्बा लिये निधि ने हायर सेकेंडरी सहित डीसीए और आईटीआई की परीक्षा अपने पैरों की बदौलत पास की.

पढ़ाई और अन्य काम के अलावा निधि पैरों की मदद से बखूबी खाना भी बना लेती है. उसके इसी जज्बे के चलते प्रदेश के किसान कल्याण और कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने इस बेटी को गोद लिया और उसे पढ़ाने में मदद भी दी.

अब परिवार की बस यही उम्मीद है कि निधि के सपनों को सरकारी नौकरी की मदद मिल जाए. जिससे जीवन में धन का अभाव उसके किसी भी काम में रोड़ा न बन सके.