आज के जमाने में बहुत कम लोगों में ही सच्ची लगन दिखाई देती है। आधुनिक युग में सभी लोग सब कुछ फटाफट चाहते हैं। अक्सर हमें अखबारों, टी.वी. में ऐसी खबरें पढऩे और सुनने को मिलती हैं कि रातों-रात कामयाबी ने कई लोगों के कदम चूमे। ऐसी खबरें देखकर और सुनकर हमारा भी मन करता है कि हमें भी वह सब कुछ जल्दी से जल्दी मिले। 


लेखक लियोनार्ड पिट्स के अनुसार अक्सर दूसरों की कामयाबी को देखकर हम लोगों को लगता है कि बड़ा नाम कमाना या सफल होना बाएं हाथ का खेल है क्योंकि हमें उनकी कामयाबी के पीछे लगी कड़ी मेहनत व लगन का अंदाजा नहीं होता। हम सिर्फ कामयाबी और सफलता को ही देखते हैं। 


लेकिन सच्ची लगन का मतलब क्या होता है? सच्ची लगन का मतलब है नाकामी या समस्याओं के बावजूद किसी भी हालत में अपने मकसद या काम में मजबूती से टिके या लगे रहना। 


महान वैज्ञानिक एल्बर्ट आइनस्टाइन जब भी कोई काम किया करते थे तो उस काम में खो जाते थे। उन्हें दूसरे किसी काम की होश नहीं रहती थी। एक बार वह अपनी लैब में कोई काम कर रहे थे तो उनकी पत्नी उनके लिए खाना लेकर आईं। उनको काम में खोया हुआ देखकर वह उनकी थाली एक टेबल पर रखकर चली गईं। उन्होंने सोचा कि जब भी काम से फुर्सत मिलेगी वह खाना खा लेंगे। साथ ही आइनस्टाइन के सहयोगी मित्र भी काम पर लगे थे। खाने की थाली देखकर उनकी भूख भड़क गई और वे आइनस्टाइन को छोड़कर खाना खाने के लिए चले गए। 


उन्होंने अपने खाने के साथ आइनस्टाइन का खाना भी खा लिया। वह पूरी लगन के साथ अपने काम में लगे थे। जब उन्होंने अपना काम निपटा लिया तो वह खाना खाने के लिए अपने टेबल के पास गए तो उन्होंने देखा कि बर्तन खाली है। उन्होंने सोचा कि शायद मैं खाना खा चुका हूं और फिर पानी पीकर वापस अपने काम में लग गए। उनके सभी सहयोगी उनकी काम के प्रति लगन को देखकर नतमस्तक हो गए। यह होती है काम के प्रति सच्ची लगन।