आचार्य चाणक्य ने जीवन से जुड़ी कुछ बातों को बताया है। जीवन से जुड़ी इन बातों को जानने से जीवन में आने वाली कई परेसानियों को टाला जा सकता है। नीचे दिए गए श्लोक में आचार्य चाणक्य ने ऐसे लोगों के बारे में बताया है जिनके बीच में से होकर नहीं गुजरना चाहिए। चाणक्य के अनुसार इन लोगों के बीच में से गुजरने से कोई न कोई बाधा उत्पन्न हो सकती है।  

ये है श्लोक

''विप्रयोर्विप्रवह्नेश्च दम्पत्यो: स्वामिभृत्ययो:।
अन्तरेण न गन्तव्यं हलस्य वृषभस्य च।।''

 

1.जब दो विद्वान लोग आपस में बात कर रहे हों तो कभी भी उनके बीच में से नहीं निकलना चाहिए। ऐसा भी कहा जाता है कि जो दो बुद्धिमान लोगों के बीच में बोलता है उसे मूर्ख कहा जाता है। चाणक्य के इस श्लोक के अनुसार कहा गया है कि दो बुद्धिमान लोग ज्ञान की बाते करते हैं इसलिए इन लोगों के बीच में बिल्कुल भी नहीं बोलना चाहिए। 

2.स्वामी और सेवक: स्वामी और सेवक के बीच कोई बात हो रही हो तो उनके बीच भी बिल्कुल भी नहीं बोलना चाहिए। अकसर स्वामी और सेवक संवाद में किसी महत्वपूर्ण बात पर विचार कर रहे हों और उनके बीच में उनकी बात अधूरी रह जाए। 

3.पति-पत्नी: चाणक्य के अनुसार जहां पति और पत्नी बैठकर बातें कर रहे हों तो उनके बीच में बिल्कुल नहीं बोलना चाहिए। इस श्लोक के अनुसार ऐसा हो सकता है कि वो कोई निजी बात कर रहे हों और उनके बीच में बोलकर उन्हें बीच में टोकना सही नहीं होता। 

4.पंडित और अग्नि के पास: पंडित और अग्नि अथार्त जहां पंडित किसी विशेष कार्य के लिए हवन कर रहा हो तो उस जगह बीच में से बिल्कुल नहीं निकलना चाहिए और न बीच में है कुछ नहीं बोलना चाहिए। इससे हवन में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।

5.हल और बैल: जहां किसान खेतों को जोत रहा हो और हल और बैल खड़े हों वहां से भूलकर भी नहीं निकलना चाहिए। ऐसा हो सकता है कि हल और बैल से बीच में निकलने पर चोट न लग जाए।