दुनिया के एकमात्र ब्रह्मा मंदिर के महंत के कमरे में मिले नगदी और कारतूस ने हर किसी को चौंका कर रख दिया है. यह मंदिर अजमेर जिले की तीर्थ नगरी पुष्कर में है.

इस मंदिर के महंत का पिछले दिनों देहांत हो गया था. इसके बाद से दिवंगत महंत सोमपुरी सुर्खियों में हैं. सोमपुरी का कार्यकाल विवादों से भरा रहा. उनकी मृत्यु के बाद भी नए-नए मामले सामने आ रहे हैं.

ताजा माला उनके तिजोरी कक्ष का है, जहां तलाशी लेने पर पलंग के नीचे रखे एक संदूक में भारी में धन मिला है. साथ ही महंत के पास भारी मात्रा में गहने और कारतूस भी मिले हैं. इसके बाद मंदिर कमेटी अन्य कक्षों पर को खंगाले के लिए प्रयासरत है.

ऐसे में सवाल उठता है कि इस महंत के पास इतनी मात्रा में कहां से इतनी नकदी और हथियार आए? कौन थे महंत सोमपुरी और कैसे बने दुनिया के इस एकमात्र ब्रह्मा मंदिर के महंत?

 

ऐसे बने महंत

सोमपुरी नागौर जिले के गांव नथावड़ा के रहने वाले थे. वे 10 साल की उम्र में पुष्कर आ गए थे और मंदिर के काम-काज में हाथ-बंटाने लगे थे. उस समय मंदिर के महंत लहरपुरी थे. धीरे-धीरे उनका मन पूजा-पाठ में लग गया और वे मंदिर की व्यवस्था देखने लगे.

इसके बाद पूर्व महंत लहरपुरी ने उनकी लगन और भक्ति भाव को देखकर महंत की गद्दी का उत्तराधिकारी बना दिया. उन्होंने अपने देहांत से पहले ही इसकी घोषणा लिखित रूप से कर दी थी. साल 2013 में महंत लहरपुरी का देहांत हो गया था. इसके बाद से ही महंत की कुर्सी सोमपुरी के पास थी.

 

विवादों से नाता

बताया जाता है कि लहरपुरी के महंत रहने के समय सोमपुरी सरिया डालकर मंदिर में रखे दानपात्रों से रुपए चुराया करते थे. उनकी ये हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी. ये मामला उस समय सामने आया जब लहरपुरी का देहांत हो गया और उन्हें मंदिर का महंत घोषित किया गया. इसके बाद जमकर विवाद हुआ था.

महंत की गद्दी बनी 'हॉट सीट'

मंदिर के महंत सोमपुरी का देहांत 11 जनवरी को हो गया था. इसके बाद से ही महंत की गद्दी 'हॉट सीट' बन गई है. मंदिर, अखाड़े और संत समाज के बीच अब यही मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है कि इस सीट पर कौन बैठेगा?

दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है. ब्रह्मा मंदिर मंहत की दावेदारी मौटे तौर पर तीन अलग-अलग जगहों से हो रही है. पहली महानिर्माणी अखाड़े की ओर से. दूसरी स्थानीय साधुसंत समाज और तीसरी दावेदारी वशिष्ठ परिवार की ओर से. विशिष्ट परिवार ही लंबे समय से मंदिर की पूजा करता आ रहा है.

किसको बिठाया जाए?

मौटे तौर पर सोमपुरी महाराज के बाद दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले संत सुरेशपुरी प्रबल दावेदार हैं. इसके अलावा, सबसे बड़ा पैंच फंसता है महानिर्माणी अखाड़े की ओर से. यही वो अखाड़ा है जहां से मंदिर मंहत तय होता है.

यह नागा साधुओं का अखाड़ा है. इसके साथ ही तीसरा समीकरण बनाने वाला पक्ष स्थानीय साधुसंत समाज का है. ऐसे में ब्रह्मा मंदिर का अगला महंत किसे बनाए जाए यह तय होने में कुछ और दिन लग सकते हैं.

अस्थाई बनाई गई कमेटी

ब्रह्मा मंदिर में जिला कलेक्टर अजमेर और आयुक्त देवस्थान विभाग ने अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जिला कलेक्टर गौरव गोयल की अध्यक्षता में अस्थाई समिति का गठन किया गया है. पांच सदस्यीय कमेटी में जिला कलेक्टर अध्यक्ष, वहीं कमेटी में तहसीलदार, उपकोष अधिकारी, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका एवं उपखंड अधिकारी पुष्कर सदस्य हैं.

सड़क हादसे में हुआ था देहांत

उल्लेखनीय है कि ब्रह्मा मंदिर के मंहत सोमपुरी के सड़क हादसे में 11 जनवरी को देहांत हो गया था. साधु-संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर परिसर में स्थित समाधीस्थल पर सोमपुरी महाराज को समाधि दी थी.

महंत की पार्थिव देह के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या मे लोग उमड़े थे. ब्रम्हा मंदिर परिसर में स्थित समाधीस्थल पर पंरपरा मुताबिक, सोमपुरी को समाधि दी गई थी. इसके बाद मंदिर की धुलाई हुई और पूजा-आरती के बाद मंदिर के पट दर्शन के लिए खोल दिए गए थे.​