करीब 9 साल पहले अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह पर हुए बम ब्लास्ट की घटना में 3 लोगों की जान भी गई थी और 15 लोग जख्मी हुए थे, जिसका  फैसला  शनिवार को आना था, लेकिन इसे जिला एवं सेशन न्यायालय जयपुर ने टाल दिया है. अब 8 मार्च फैसला सुनाया जाएगा.

इससे पहले सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया. वहीं अदालत ने कहा मामला बड़ा होने के चलते केस का शनिवार तक पूरा विश्लेषण नहीं हो पाया है इसलिए फैसला 8 मार्च को सुनाया जाएगा.

वहीं आपको बता दें कि पूरे मामले की सुनवाई में करीब 9 साल 4 माह और 6 दिन का समय लगा. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से करीब 149 गवाह पेश किए गए, जिसमें से करीब 26 महत्वपूर्ण गवाह पक्षद्रोही हो गए.

इस मामले की सबसे पहले राजस्थान एटीएस ने जांच शुरू की. एटीएस ने पूरे मामले में तीन आरोपी देवेन्द्र गुप्ता, लोकेश शर्मा और चन्द्रशेखर लेवे को साल 2010 में गिरफ्तार कर लिया. वहीं 20 अक्टूबर 2010 को मामले से जुड़ी पहली चार्जशीट भी कोर्ट में पेश कर दी गई, लेकिन इसके बाद अप्रैल 2011 में गृह विभाग द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी करके मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई.

एनआईए ने मामले में जांच आगे बढ़ाई और हर्षद सोलंकी, मुकेश बसानी, भरतमोहनलाल रतेश्वर, स्वामी असीमानंद, भावेश अरविन्द भाई पटले और मफत उर्फ मेहूल को गिरफ्तार किया. वहीं मामले में तीन चार्जशीट और पेश की.

पूरे मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 442 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए 149 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए, जिसमें से 26 गवाह पक्षद्रोही हो गए. वहीं बचाव पक्ष की तरफ से 38 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए 2 गवाह पेश किए गए. अभियोजन पक्ष भी मानता है कि जो गवाह पक्षद्रोही साबित हुए हैं. वे काफी महत्वपूर्ण हैं. वहीं बचाव पक्ष ने मामले में कई आरोपियों को झूठा फंसाने की बात भी कही है.

भावेश की तरफ से पैरवी करने वाले अधिवक्ता लोकेश शर्मा ने कहा कि हमने कोर्ट में कई ऐसे साक्ष्य पेश किए हैं, जिससे यह साबित होता है कि मेरे क्लाइंट को झूठा फंसाया गया है. मामले में कोर्ट ने लम्बी सुनवाई की है. ऐसे में अब सबकी नजरें कोर्ट पर टिकी हुई हैं.