कई दिनों से गायब दिग्गी बाबू आज फिर अखबारों में उस गधे को हड़काते नजर आये जिस गधे को अखिलेश बाबू ने दो चार दिन पहले देश के पॉलिटिकल बाड़े मे छोड़ा था.. दिग्गी बाबू विवादास्पद बयानों के गुरू है.. यूं आजमखान, औवेसी, लालू , मुलायम, माया.. हो या बीजेपी के योगी जोगी.. अकसर इस तरह के कई नेताऔ के बयान अखबारो के लिए विटामिन्स की तरह होते है जो अखबारो की सेहत को बनाये रखते है .. अकसर अखबार बाजार की पसंद को खयाल में रख छापे जाते हैं .. (जैसे अभी देश में गधा और प्रदेश में थप्पड़).. आप और मुझे ये खबरें पसंद ना हो पर मार्केट में इनकी डिमांड है.. लोगों को मनोरंजन चाहिए.. नेताओं को सुर्खियाँ... गोया वाट्सएप पर बेहूदा और बेमतलबी चुटकुले अभी बरसों तक राज करेगे.. अच्छी कविताएं डायरियों मे दुबकी रहेगी और फूहड़ कविसम्मेलन देर रात तक जमते रहेंगे.. उँची आवाज मे डीजे बजाने का समर्थन होगा.. मंहगी शादियों का मंहगा खाना मीनू वाले पन्नोे मे छपने के बाद.. दूसरे दिन सड़क पर पसरा नजर आता रहेगा.. मजबुरियों में ही सही, मृत्युभोज होते रहेगें.. ये शौक है हमारे.. और संस्कार भी.. खैर.... बदलाव तो होगा.. बहुत कुछ बदलेगा...