उत्तर प्रदेश में जिस साइकिल के सहारे समाजवादी और कांग्रेस पार्टी सियासी दांव लगाए हुए हैं उसी साइकिल के जरिए राजस्थान में भाजपा पर 'भगवाकरण' के आरोप लगने लगे हैं.

दरअसल, सरकारी स्कूल की छात्राओं को मुफ्त में दी जाने वाली साइकिल का रंग इसबार काले से नारंगी कर दिया गया है. कांग्रेस इस रंग के चलते ही सरकार पर भगवाकरण का आरोप लगा रही है. हालांकि भाजपा सरकार ने इस बदले रंग को बच्चों की कलरफुल पसंद और चीयरफुल लुक का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया है.

प्रदेश कांग्रेस के महासचिव पंकज मेहरा ने कहा है कि राजस्थान सरकार ने पहले स्कूल के पाठ्यक्रम का भगवाकरण किया और अब स्कूल का रंग बदल दिया है. इसके पीछे भी अपनी विचारधारा को बढ़ावा देना है.

ये है साइकिल की पूरी कहानी

पिछली कांग्रेस सरकार 2012-13 में स्कूली लड़कियों को साइकिल दिए जाने का प्रस्ताव लेकर आई थी. सरकार की इस योजना में किसी खास रंग की साइकिल बांटे जाने का उल्लेख नहीं था. लेकिन पिछले साल तक काले रंग की साइकिल ही बांटी गई थी. पिछले साल भाजपा सरकार ने साइकिल का रंग नारंगी करने का फैसला लिया था.

कितनी साइकिल हुई नारंगी?

सरकारी सूत्रों के अनुसार भाजपा सरकार ने 3 जनवरी को 2 लाख 95 हजार 671 साइकिल की सप्लाई का ऑर्डर जारी किया. ये सभी साइकिल नारंगी रंग की सप्लाई की जानी थी. इसके लिए ऑर्डर चार महीने में पूरा करना था. अभी तक 50000 साइकिल सप्लाई की जा चुकी हैं.

किसे मिलती है साइकिल?

सरकारी योजना के तहत स्कूली छात्राओं को साइकिल मुफ्त बांटी जाती हैं. इस योजना के तहत 9वीं क्लास की उन लड़कियों को साइकिल दी जाती हैं जो स्कूल के 5 किलोमीटर की दूरी पर रहती हैं. जो लड़कियां इससे भी दूर रहती हैं सरकार उन्हें ट्रांसपोर्ट वाउचर के तौर पर 20 रुपए रोजाना देती है.

कोटा में साइकिल वितरण के साथ शुरू हुआ विवाद

कोटा जिले के सरकारी स्कूलों में साइकिल बांटे जाने के दौरान ही इनके रंग पर विवाद शुरू हुआ. साइकिल के जिस नारंगी रंग को चीयरफुल बताया गया उसे कांग्रेस ने भगवाकरण का नाम दे दिया. कोटा के अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र गहलोत के अनुसार कोटा के 297 सरकारी स्कूलों में 9वीं क्लास की लड़कियों को 6 हजार 283 साइकिल बांटी जानी हैं.