राजस्थान के अजमेर में स्थित गरीब नवाज की दरगाह में नौ साल पहले हुए धमाके के मामले में एनआईए की अदालत ने फैसला सुना दिया है. अदालत ने दोनों दोषियों भावेश पटेल और देवेन्द्र गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

साथ ही कोर्ट ने भावेश पटेल पर 10 हजार और देवेन्द्र गुप्ता पर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका है. इस मामले में तीसरे दोषी सुनील जोशी की पहले ही मौत हो चुकी है.

8 मार्च को इस मामले में तीन आरोपियों को अदालत ने दोषी करार दिया था, लेकिन उन्हें सजा पर फैसला 18 मार्च तक टाल दिया गया. 18 मार्च को बचाव पक्ष की दलीलों के बाद कोर्ट ने फैसला 22 मार्च के लिए टाल दिया था. 18 मार्च को दोषियों को सजा के बिंदुओं पर बहस हुई थी. इसी के चलते सजा का फैसले में देर हुई और अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था.

2007 में हुआ था ब्लास्ट

राजस्थान की अजमेर दरगाह शरीफ में रोजा इफ्तार करने वाले जायरीनों के बीच यह ब्लास्ट 11 अक्टूबर 2007 को किया गया था. इस नापाक हरकत के 9 साल बीत जाने के बाद 8 मार्च को तीन आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था.

गरीब नवाज की दरगाह में करीब 6:15 शाम दरगाह में एक ब्लास्ट हुआ, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई. 15 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. ब्लास्ट के लिए दरगाह में दो रिमोट बम प्लांट किए गए थे, लेकिन इनमें से एक ही फटा था.