कोटा के एक निराश्रित गृह में रह रहे नाबालिग भाई-बहन सूरज और सलोनी बंजारा ने कच्ची उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था. उन्हें किसी भी चीज का होश नहीं था और जब होश संभाला तो बाल कल्याण समिति से कहा कि पुलिस सुरक्षा में उनके मंडाना में 2013 से बंद पड़े घर की तलाशी ली जाए.

इसके लिए दोनों को पुलिस थाने में रखी घर की चाबी हासिल करने में बरसों लग गए, लेकिन आखिरकार एक दिन उन्हें कामयाबी मिली और पुलिस के साथ जाकर देखा तो पुराने घर में सोने-चांदी के जेवरात और दूसरे सामान के अलावा 96,000 की नकदी भी मिली.

लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ये नकदी कोई 50 और 100 के नोटों की नहीं थी बल्कि 500 और 1000 के पुराने नोटों की है जो भारत सरकार बंद कर चुकी हैं.

अब 12 साल की सलोनी बंजारा के लिए ये रकम महज कागज का टुकड़ा रह गई है. इसके लिए वह अपने बड़े भाई सूरज के साथ मिलकर आरबीआई और भारत सरकार से रहम की गुहार लगा रही है. दोनों भाई-बहन को उम्मीद है कि और कोई नहीं तो देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री और अपने आपको प्रधान सेवक कहने वाले प्राइम मिनिस्टर मोदी उनकी बात जरूर सुनेंगे. इसके लिए उन्होंने कहा कि प्लीज मोदी अंकल मेरी मदद कर दो.

वहीं, आरबीआई ने कोटा की बाल कल्याण समिति द्वारा पुराने नोटों की रकम को मृतका की 12 साल की बेटी के नाम एफडी कराने की मांग को ठुकरा दिया है.

आपको बता दें कि सलोनी और सूरज को उसके पिता साल 2007 में छोड़ गए थे और मां की साल 2013 में हत्या कर दी गई थी. तब से राजकीय निराश्रित गृह में दिन काट रहे भाई-बहन की जिद पर एक दिन बाल कल्याण समिति पुलिस जाब्ते को साथ लेकर कोटा के मंडाना में स्थित इनके बरसों से बंद पड़े घर की तलाशी लेने बीते दिनों पहुंची थी.