तेजी से फैलते स्वाइन फ्लू के डंक ने कोटा के चिकित्सक अमले में हड़कंप मचा दिया. आलम ये है कि एक माह में ही कोटा में स्वाइन फ्लू ने चार जिन्दगियों को लील लिया. हाल में हुई चार मौतों में एक गर्भवती महिला भी शामिल है. आनन-फानन में चिकित्सा विभाग ने सर्वे की कवायद शुरू कर दी है.

स्वाइन फ्लू रोगियों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से चिकित्सा विभाग की चिन्ताएं बढ़ने लगी हैं. विभाग 50 घरों के स्थान पर 300 घरों का सर्वे करवाकर संदिग्ध रोगियों को दवा वितरण करवा रहा है. प्रतिदिन दो दर्जन से अधिक रोगी स्वाइन फ्लू की जॉच करवा रहे हैं.

पिछले सीजन में एक दर्जन स्वाइन फ्लू रोगियों का मामला सामने आया था, जिसमें से दो लोगों की मौत की पुष्टि चिकित्सा विभाग ने की थी. इस बार विभाग द्वारा स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए किए जा रहे सारे प्रयास नाकाम साबित हो रहे है.

एक माह में स्वाइन फ्लू से चार मौतों का आंकडा न केवल चौकाने वाला है बल्कि स्वाइन फ्लू से होने वाली सबसे अधिक मौतों वाले शहरों की सूची में कोटा का नाम शामिल हो गया है.

इस बीमारी की दस्तक के बाद ही कोटा के एमबीएस, न्यू मेडिकल अस्पताल और सभी सरकारी व निजी अस्पतालों में भीड़ देखी जा सकती है. सेन्ट्रल और निजी लैब में स्वाइन फ्लू की जांच करवाने वाले रोगियों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

डाक्टरों के अनुसार, स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बिमारी है, जो इनफ्लूएंजा वायरस एच 1 एन 1 से होता है. बचाव के साथ-साथ मरीज को चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है. कमजोर लोग, गर्भवती महिला, पांच साल से कम उम्र के बच्चे और अस्थमा रोग से ग्रसित मरीज को ज्यादा सावधान रहने की आवश्यकता है.