इलाहाबाद, एक तरफ तीन तलाक का मुद्दा गरमाया हुआ है और महिलाएं इस मुद्दे को लेकर मुखर होने लगी हैं तो दूसरी ओर श्रम विभाग के एक अफसर ने स्पीड पोस्ट से तलाक भेज दिया। पीड़िता ने तलाक के खिलाफ विरोध जताते हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। प्रधानमंत्री को भी ट्वीट किया है। पीड़ित महिला को पहला तलाक तो उसी शाम को दिया गया था जिस दोपहर को निकाह हुआ था।

मूलरूप से इलाहाबाद की आलिया एक कम्पनी चलाती हैं। उनका निकाह चार माह पहले (23 नवंबर 2016) हुआ था। आरोप है कि शादी के समय ही दहेज के रूप में एक फार्च्यूनर गाड़ी और 25 लाख रुपए की मांग ससुरालियों ने की थी, जिसे लेकर थोड़ा बवाल भी हुआ था। मामला किसी तरह से शांत हुआ और निकाह हो गया। निकाह के बाद ही ससुरालियों ने सभी गहने ले लिए और उन्हें पति के साथ एक होटल में छोड़कर अपने कन्नौज जिले में स्थित अपने पैतृक गांव लौट गए।

अगले दिन जब वह ससुराल पहुंचीं, तो वहां उन्हें पता चला कि उनके पति की एक शादी पहले ही हो चुकी है। आलिया का आरोप है कि उन्होंने विरोध दर्ज कराया तो यह बताते हुए ससुराल से निकाल दिया गया कि पहली पत्नी से तलाक हो चुका है। वह कानपुर के अशोकनगर स्थित घर लौट आईं, जहां उनकी मां रहती हैं। पिता का निधन हो चुका है। दो भाई हैं, जो विदेश में रहते हैं। एक बार उन्होंने फिर ससुराल जाने का प्रयास किया लेकिन लौटा दिया गया। उन्हें यह भी जानकारी मिली कि पहली बीवी से उनके पति का तलाक नहीं हुआ है।

आलिया ने बताया कि 30 जनवरी को एक स्पीड पोस्ट आया। स्पीड पोस्ट को खोलते ही उनके होश उड़ गए। उसमें तीन तलाक के कागजात थे। इन कागजात के अनुसार, आलिया को पहला तलाक शादी वाले दिन ही शाम को दे दिया गया था। दूसरा तलाक बीते साल 22 दिसंबर को दिया गया। तीसरा तलाक 22 जनवरी-17 को दिया गया और कागजात पोस्ट से भेज दिए गए।

आलिया ने इस तलाकनामे पर सवाल उठाया है कि स्पीड पोस्ट से तीन तलाक कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि वह इस लड़ाई को जरूर लड़ेंगी। उन्होंने इस मामले में कानून की भी शरण ली है। फिलहाल वह सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही हैं। आलिया ने राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से इस मामले में न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ट्वीट कर उन्होंने मामले की जानकारी दी है।