हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां देवी-देवताओं के कई मंदिर हैं. इसमें खास बात यह है कि इस प्रदेश में हर गांव में कम से कम एक मंदिर जरूर है. हिमाचल में ऐसा कोई उत्सव नहीं होता है जोकि स्थानीय देवता के बिना पूर्ण होता हो. प्रदेश में करीब करीब 2000 मंदिर हैं. इन 2 हजार मंदिरों में ये 10 मंदिर टॉप टेन में आते हैं.

 

  1. कांगड़ा के ज्वालाजी में बना ज्वालामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में से एक है. यह मंदिर मां की जलती हुई ज्योत के कारण प्रसिद्ध है जोकि चट्टानों से निकलती है. इन चट्टानों की दरारों में से ज्वाला हर समय निकलती रहती है. सम्राट अकबर ने इस ज्वाला को बुझाने के कई प्रयास किए, लेकिन वह असफल रहा था.
  2. कांगड़ा में चामुण्डा मां का मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है. ये बनेर नदी के साथ 16वीं सदी में बना है. मां चामुण्डा मां दुर्गा का ही रूप है. यह मंदिर शिव शक्ति के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए इस मंदिर को चामुण्डा नंदिकेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है.
  3. हिमाचल प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध मंदिर नैना देवी का है. यह मंदिर जिला बिलासपुर में सुन्दर पहाड़ी पर स्थित है. यह मंदिर उन 51 शक्तिपीठों से सम्बंधित है जहां मां सती के नैन गिरे थे. यहां धार्मिक श्रद्धालु और तीर्थयात्री पूरा वर्ष भर आते रहते हैं.
  4. प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली में मां हिडिम्बा का मंदिर स्थित है. यह मंदिर महाबली भीम की पत्नी को समर्पित है. भीम और हिडिम्बा ने शादी के बाद यहां कई वर्ष गुजारे थे. यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. इस मंदिर को कई बार इसके स्वरूप के कारण ढुंगरी के नाम से भी जाना जाता है.
  5. प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली में मां हिडिम्बा का मंदिर स्थित है. यह मंदिर महाबली भीम की पत्नी को समर्पित है. भीम और हिडिम्बा ने शादी के बाद यहां कई वर्ष गुजारे थे. यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. इस मंदिर को कई बार इसके स्वरूप के कारण ढुंगरी के नाम से भी जाना जाता है.
  6. चंबा जिले में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में भी हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. इस मंदिर का निर्माण राजा साहिल वर्मा ने कराया था. किवदंती के अनुसार, राजा ने अपने पुत्रों को पर्वत से संगमरमर के पत्थरों की खोज में भेजा था ताकि भगवन विष्णु की मूर्ति बना सके.
  7. कांगड़ा शहर के बीचों-बीच स्थित है मां ब्रजेश्वरी का मंदिर. यहां जिले के अन्य मंदिरों के मुकाबले ज्यादा पर्यटक आते हैं. यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है. यह एक शक्ति पीठ है, जहा मां सती का बायां वक्षस्थल गिरा था, इसलिए इसे स्तनपीठ भी कहा गया है और स्तनपीठ भी अधिष्ठात्री वज्रेश्वरी देवी है. स्तनभाग गिरने पर वह शक्ति जिस रूप में प्रकट हुई वह ब्रजेश्वरी कहलाती है. एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि उत्तर भारत के आक्रमणकारियों ने इस मंदिर को कई बार लगातार लूटा.
  8. समुद्र तल से 8500 फीट की ऊंचाई पर शिमला में स्थित जाखू मंदिर की भी कई किवदंतियां हैं. यह मंदिर एक साधु याकू ने बनाया था जोकि हनुमानजी का भक्त था. याकू के नाम पर ही जाखू नाम पड़ा.
  9. तारा देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के शिमला में स्थित है. यह मंदिर 250 साल पुराना है. मान्यता के अनुसार तारा देवी को पश्चिम बंगाल से सेन साम्राज्य का राजा लाया था. बाद में राजा भूपेन्द्र सेन ने इस मंदिर को लकड़ी और वैष्णव तरीके से तैयार करवाया था.
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