वाराणसी। स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी के लिए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों का डॉक्टरों और विभागीय अधिकारियों पर असर नहीं दिख रहा है। सरकारी अस्पतालों में पर्ची में कैपिटल लेटर में दवा लिखने का निर्देश पिछले सप्ताह ही जारी किया गया था लेकिन डॉक्टर पर्चे पर दवाओं का नाम ऐसे लिखते हैं कि एक भी मरीज नहीं पढ़ पाते हैं।

 कभी-कभी तो दवा काउंटर पर कर्मचारी भी इसे पढ़ने में चकरा जाते हैं। इसके अलावा अभी तक अस्पतालों में डॉक्टरों के नाम और फोटो के साथ मोबाइल नंबर वाली सूची भी नहीं लग सकी है।

बनारस में कबीरचौरा स्थित मंडलीय, महिला अस्पताल, बीएचयू सर सुंदर लाल अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर और दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन हजारों मरीज आते हैं। बीएचयू के अलावा बाकी अस्पतालों में मरीजों को अस्पताल परिसर से ही नि:शुल्क दवा दी जाती हैं।

 इसमें मरीजों की सहूलियत के लिए प्रदेश सरकार ने जेनेरिक दवाएं लिखने के साथ ही कैपिटल लेटर में ही पर्चे पर दवा का नाम लिखने का निर्देश दिया था लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है।

 मंगलवार को महिला अस्पताल में इलाज कराने आई पड़ाव निवासी परवीन, मंडलीय अस्पताल में चौक निवासी युसुफ और बीएचयू ट्रॉमा सेंटर की ओपीडी में इलाज कराए रोहताश के विकास कुमार से जब पर्चे पर लिखी दवा का नाम पढ़ने को कहा गया है वह उस पर लिखी स्पेलिंग नहीं पढ़ सके। बताया कि डॉक्टर क्या लिखे हैं कि यह समझ से बाहर हैं।