राजस्थान में औषधीय वृक्ष सेजना को लेकर राज्य का कृषि विभाग एक नवाचार करने जा रहा है. इस औषधीय वृक्ष के महत्व को किसानों तक पहुंचाने और इसे व्यवसायिक फसल के रूप में अपनाने की रणनीति बनाई गई है.

कृषि विभाग अपने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से इस औषधीय वृक्ष की खेती के लिये किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराएगा.

औषधीय वृक्ष सेजना को सामान्यतया 'ड्रम स्टिक' के नाम से पहचाना जाता रहा है, हालांकि इसके पेड़ अभी तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ग़ैर व्यवसायिक उपयोग के लिये लगाये जाते रहे हैं. इसके औषधीय महत्व को देख आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में इसकी व्यवसायिक खेती की जा रही है.

राज्य का कृषि विभाग इसकी खेती को लोकप्रिय बनाये जाने की कार्य योजना तैयार कर रहा है. कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी कि माने तो प्रदेश का कृषि विभाग यूएसए के कृषि विभाग के साथ मिलकर सेजना की नवीन शोध आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिये योजना तैयार कर चूका है.

सैनी ने बताया कि इस पेड़ पर की गई नवीन शोधों के अनुसार इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम व आयरन की भरपूर मात्रा तो पायी गई है, साथ ही इसके पत्तों से तैयार किया गया विशेष चारा भी पशुओं के दूध की मात्रा बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुआ है.

सैनी की माने तो इसके औषधीय महत्ता का पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके फूल, छाल, फलियों, बीज व पत्तों से बनी विभिन्न प्रकार की औषधियों से मधुमेह व हैपेटाईटिस बी जैसी बीमारियों के अलावा लगभग 300 तरह की बीमारियों का उपचार किया जा सकता है.