पण्डित दीनदयाल उपाध्याय वांड्.मय लोकार्पण एवं जन्म शताब्दी समारोह आयोजित

भीलवाड़ा।
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने जो विचारधारा प्रस्तुत की, वह वर्तमान में देश को सही दिशा मंे ले जाने में सक्शम है और उनकी विचारधारा ही अभी देश की जरूरत बन चुकी है। देश को आजादी तो मिली, मगर जिस तरह की आजादी चाहिये थी, उस दिशा की तरफ ले जाने में पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा सक्शम है। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी रविवार को महाराणा प्रताप सभागार में पण्डित दीनदयाल उपाध्याय संपूर्ण वांड्.मय लोकार्पण एवं जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रो. सोलंकी ने कहा कि आज भी जब इस बात पर विचार होता है कि जिस उम्मीद और अपेक्शा के साथ देश ने आजादी पायी, क्या उन पर खरा उतरा गया है, तो निश्कर्श यह निकलता है कि आजादी की अपेक्शाएं अभी तक पूरी नहीं हो पायी है। आजादी के बाद भी देश को सही दिशा नहीं मिल पायी। सही दिशा दिखाने के लिए ही पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा का अध्ययन करने और उस पर अमल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रत्येक व्यक्ति का विकास उसकी प्रकृति पर निर्भर करता है उसी तरह देश का विकास भी तभी होगा जब इसकी प्रकृति के हिसाब से दिशा मिले और उस पर अमल किया जावे। उन्होंने कहा कि अच्छाई जहां से भी मिले, उसे स्वीकार तो करना चाहिए मगर वह देश के अनुकुल हो इस बात की महती आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा कि 21वीं शताब्दी में भारत विश्व का मार्गदर्शन करेगा, इस मार्गदर्शन का रास्ता पण्डित दीनदयाल उपाध्याय वाड्ंमय में सुझाया गया है।

समारोह में मुख्य वक्ता डाॅ. महेशचन्द्र शर्मा ने कहा कि पण्डित दीनदयाल उपाध्याय अपने कर्म से पहचाने गये। देश जिस तरह का रास्ता तलाश रहा है, वह पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने दिखाया है। उन्हांेने अपने जीवन दर्शन मंे दीर्घकालिक बातें कही और देशहित के सभी मुद्दों को स्वभाविक भाव से उठाया। डाॅ. शर्मा ने कहा कि आज राश्ट्रवाद की संज्ञा की व्याख्या करने की आवश्यकता है। पण्डित उपाध्याय ने भारत के विचार को पहचानने की पुरजोर पैरवी की। डाॅ. शर्मा ने कहा कि देश और समाज को सही दिशा में ले जाने के लिए वांड्.मय का जरूर अध्ययन करें।

समारोह की अध्यक्शता करते हुए एलएनजे समूह के संस्थापक लक्श्मीनिवास झुनझुनवाला ने कहा कि यदि पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा पर चलते तो देश कभी विभाजित नहीं होता। उन्हांेने कहा कि पण्डित उपाध्याय की विचारधारा को वांड्.मय के जरिये समझे। कार्यक्रम में विशिश्ठ अतिथि साहित्यकार डाॅ. युगलकिशोर सुरोलिया ने कहा कि देश और समाज निर्माण के लिए जो स्वप्न पण्डित दीनदयाल उपाध्याय ने देखा, उसे पूरा करें और देश निर्माण मंे उनके योगदान को समझें और उसका अनुसरण भी करें। कार्यक्रम के प्रारंभ में वांड्.मय पर आधारित डाॅक्यूमेन्ट्री भी दिखाई गई। साथ ही मंच पर अतिथियों के साथ ही मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर, सांसद सुभाश बहेड़िया, विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी, महन्त हंसराम जी, दयाराम मेठानी, योगेन्द्र शर्मा, गोपाल आचार्य, तिलोक छाबड़ा, न्यास अध्यक्श गोपाल खण्डेलवाल ने वांड्.मय का लोकार्पण किया। समारोह के संयोजक लक्श्मीनारायण डाड ने अतिथियों का स्वागत करते हुए वांड्.मय की प्रस्तावना प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी का स्वागत वंदेमातरम् संस्थान के कमलेशसिंह गुढ़ा, प्रशान्त मेवाड़ा, कन्हैयालाल स्वर्णकार, उदयलाल भडाणा आदि ने माल्यार्पण कर स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। समारोह का संचालन न्यास के पूर्व अध्यक्श लक्श्मीनारायण डाड ने किया। आभार राजेन्द्र ओस्तवाल ने व्यक्त किया।