भोपाल। औद्योगिक क्षेत्र अशोका गार्डन में 11 साल के मासूम की साड़ी के झूले पर खेलते-खेलते फांसी लग गई। झूला मृतक की डेढ़ साल की बहन के लिए लगाया गया था। बेटे की मौत से अनजान करीब तीन फीट की दूरी पर बैठी मां को उसकी चीख तक नहीं सुनाई दी।

आदर्श नगर निवासी राकेश पवार प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनके छोटे भाई अनिल पवार का एकलौता 11 वर्षीय बेटा साहिल कक्षा 5वीं में पढ़ता था। बुधवार को राकेश और अनिल एक शादी में शामिल होने महाराष्ट्र गए हुए थे। यहां घर पर अनिल की पत्नी चंदा, बेटा साहिल और बेटी परी थे।

गुरुवार शाम करीब साढ़े 5 बजे चंदा ने साहिल को ड्रम से पानी भरने को कहा। साहिल पानी भरने के बाद कमरे में बंधे झूले में खड़े होकर झूलने लगा। चंदा दरवाजे पर ही बैठी हुई थी। दरवाजा आधा बंद हो गया था, जिससे चंदा अंदर नहीं देख पाई। करीब 15 मिनट बाद पौने छह बजे दादी ने साहिल को आवाज लगाई।

चंदा ने जैसे ही खड़े होकर दरवाजा खोला तो साहिल को झूले के फंदे में लटका देख गिर पड़ी। दादी और अन्य लोगों ने तत्काल उसे फंदे से उतारा और पास के ही रोशन अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने चेक करने के बाद उसे हमीदिया अस्पताल रैफर कर दिया।

हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों के मृत घोषत करने के बाद सूचना अशोका गार्डन पुलिस को पहुंची। उधर, सूचना मिलते ही पिता तत्काल भोपाल आ गए। घर आते ही सबसे पहले वे साहिल को आवाज लगाते हुए अंदर आए, लेकिन चंदा की हालत देख वे भी दरवाजे पर माथा पीटते हुए बैठ गए। पुलिस ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।

पूरी तरह साड़ी में गुथ गया था गला

जैसा मृतक की दादी ने नवदुनिया को बताया - 'चंदा दरवाजा खोलते ही गिर पड़ी। अंदर देखने पर साहिल झूले में गुथ चुका था। उसका गला साड़ी से लिपटा हुआ था। साड़ी का फंदा इस कदर गुथ गया था कि उसका शरीर पूरी तरह ठंडा हो चुका था। सांसें तो थी ही नहीं, लेकिन सिर्फ करिश्मे की उम्मीद में हम उसे अस्पताल ले गए थे।

मैं कहती थी झूला मत झूल, लेकिन तूने एक नहीं सुनी

बेटे की लाश देखने के बाद से ही चंदा के हाल बेहाल हैं। हर पांच मिनट में चक्कर आकर चंदा गिर पड़ती है। महिलाओं के रोकने के बाद भी वह बाहर से उठकर कमरे के अंदर जाती है और फिर बाहर आकर गिर जाती है। वह सिर्फ एक ही बात कहती है 'साहिल मैंने तुझे मना किया था झूला मत झूल। यह तेरी छोटी बहन के लिए था। तूने मेरी बात क्यों नहीं सुनी बेटा। मेरा अब क्या होगा। इतना कहते-कहते चंदा बेहोश हो जाती है।