मुंबई। मोहित सुरी की फिल्म हाफ गर्लफ्रैंड आज रिलीज हो गई है। ये फिल्म चेतन भगत के नॉवेल पर बेस्ड है। यह कहानी बिहार के रहने वाले माधव झा की है, जो दिल्ली आकर स्पोर्ट्स कोटे से यूनिवर्सिटी में दाखिला लेता है। यहां उसकी मुलाक़ात रिया सोमानी से होती है।

दोनों का एक इंट्रेस्ट काफी सिमिलर है, बास्केटबॉल। दिल्ली की रहने वाली रिया पर माधव का दिल आ जाता है, लेकिन रिया उसे प्यार नहीं करती। हालांकि, वह माधव की हाफ गर्लफ्रैंड बन जाती है। किन्हीं कारणों से दोनों के बीच मत-भेद होते हैं। इसके बाद कहानी बिहार और लंदन तक भी जाती है। माधव की लव स्टोरी में उसके दोस्त शैलेश का भी अहम योगदान होता है। अब क्या माधव और रिया की लव स्टोरी पूरी हो पाएगी? इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

बता दें कि फिल्म का डायरैक्शन अच्छा है। लोकेशंस भी कमाल के हैं। सिनेमैटोग्राफी, कैमरा वर्क भी बढ़िया है। फिल्म की कहानी काफी प्रेडिक्टेबल और कमजोर है, जो कि इस तरह से आगे बढ़ती है कि बोरियत होने लगती है। इसके पहले भी चेतन भगत के उपन्यासों को फिल्मों में तब्दील किया गया है, लेकिन यह फिल्म उस लेवल की बन नहीं पाई है। जिस तरह के सिनेमा का इंतजार था, वो नहीं मिल पाया।

एक दर्शक के तौर पर जहन में एक ही सवाल चल रहा होता है कि आख़िरकार ऐसी फिल्म बनाने के पीछे क्या मक़सद है, जिसमें किरदारों के एक्टिविटीज का उद्देश्य ही समझ नहीं आता। कोई परिवार से दूर हो रहा है तो कोई प्यार से। वजह बताने के लिए कोई भी तैयार नहीं हैं। इमोशन से भरी कहानी इमोशनलेस दिखाई पड़ती है। अर्जुन कपूर का काम सहज है और माधव के किरदार में वे फिट बैठे हैं। उनका बात करने का अंदाज भी अच्छा है।

अर्जुन के दोस्त के रूप में मंझे हुए एक्टर विक्रांत मस्सी के काम को देखते हुए कहा जा सकता है कि उनको फ्यूचर में और भी प्रोजेक्ट्स मिलेंगे। श्रद्धा कपूर का काम भी अच्छा है और बाकी कलाकारों ने भी अपना पूरा योगदान दिया है। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है और कहानी के साथ-साथ चलता है। 'फिर भी तुमको चाहूंगा' सबसे अच्छा सॉन्ग है। बाक़ी गाने ठीक तो हैं, लेकिन स्क्रीनप्ले के दौरान कहानी की लय को तोड़ते हैं।