राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने शुक्रवार को अजमेर इंजीनियरिंग कॉलेज में हुए भर्ती घोटाला मामले में जांच के आदेश जारी किए हैं. पांच साल पुराने मामले में सीएम ने तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को जांच का जिम्मा सौंपा है. हालांकि इस मामले में पहले भी दो बार उच्च स्तरीय जांच हो चुकी है, लेकिन दोषियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

जानकारी के अनुसार साल 2011-12 और 2012-13 में अजमेर इंजीनियरिंग कॉलेज में नॉन टीचिंग स्टॉफ की भर्ती हुई थी. तत्कालीन प्राचार्य प्रो. एमएम शर्मा और एमसी गोविल के कार्यकाल में हुई इस भर्ती में जमकर भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद हुआ. इस पूरे मामले में पूर्व मंत्री रामकिशोर सैनी के ओएसडी रहे शिवपाल यादव ने भाई कैलाश यादव और उसकी पत्नी संतोष यादव सहित दो अन्य रिश्तेदारों को भी नौकरी दिलवा दी थी. इसे लेकर छात्र संगठनों ने लंबे समय तक आंदोलन चलाया जिसके चलते राज्य सरकार ने मामले की जांच तत्कालीन वित्त सचिव सुरेश चंद दिनकर को सौंपी थी. दिनकर ने अपनी जांच रिपोर्ट में घोटाले की पुष्टि करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी. 22 जून 2016 को तकनीकी शिक्षा विभाग ने संयुक्त सचिव तकनीकी शिक्षा के अलावा तीन प्रोफेसरों की टीम वाली जांच समिति बनाई, लेकिन इसकी रिपोर्ट एक साल बीत जाने के बाद भी नहीं आइै है.

मसूदा से विधायक सुशील कंवर पलाडा ने पिछले दिनों केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री और मुख्यमंत्री को भी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा था. जिस पर सीएम राजे ने तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को जांच का जिम्मा सौंपा है.