भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा को अपने बड़बोले अंदाज के लिए जाना जाता है। समाज में फैले लिंग भेदभाव को एक अपवाद बताते हुए सानिया ने कहा कि खेल की दुनिया भी इस बुराई से बची नहीं है। सानिया ने बताया कि महिला डबल्स रैंकिंग में पूर्व टॉप वरीय खिलाड़ी होने के बावजूद उन्हें समान पुरस्कार राशि पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। 

सानिया ने कहा, 'लिंग भेदभाव दुनिया में हर जगह है। विश्व टेनिस संघ (डब्ल्यूटीए) में हमें आज भी समान पुरस्कार राशि के लिए लड़ना पड़ता है। जब मैं 2015 में विंबलडन जीतकर भारत लौटी थी, तो मुझसे फैमिली प्लान करने के बारे में पूछा गया था।' सानिया ने कहा, 'वर्ल्ड चैम्पियन होने के बावजूद भी मेरे जीवन को पूरा नहीं माना गया। ये मेरे लिए लिंग भेदभाव की सबसे चरण सीमा थी।'

अपने अब तक के सफर और फैमिली से मिल सपोर्ट के बारे में सानिया ने कहा, 'मेरी फैमिली ने मुझे कभी नहीं कहा कि मैं किसी चीज को करने में सक्षम नहीं, क्योंकि मैं एक लड़की हूं। मैं अपने सपनों को पूरा नहीं कर सकती।' सानिया और उनके पिता इमान मिर्जा ने एक वीडियो जारी कर लिंग भेदभाव के बारे में जागरुकता फैलानी की कोशिश की है।