अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में सोमवार को जन्नती दरवाजा खोला गया. अल सुबह खुले जन्नती दवाजे से गुजरने वालों की खासी भीड़ देखने को मिली.

ये जन्नती दरवाजा साल में चार बार खोला जाता है. ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स में 6 दिनों के लिए, ईद उल अजहा पर एक दिन के लिए, ईद उल फितर पर एक दिन के लिए और ईद की छठी पर ख्वाजा गरीब नवाज के गुरु के उर्स में.

इस जन्नती दवाजे से गुजरने के लिए देर रात से ही दरगाह में कतार लग जाती है. जन्नती दरवाजा खुलने के समय भीड़ में भगदड़ नहीं हो इसलिए भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस जाब्ता दरगाह में तैनात किया गया. ये दरवाजा सोमवार दोपहर तक जोहर की नमाज के बाद बन्द कर दिया जाएगा.

इसी के साथ रमजान का मुकद्दस महीना साल भर के लिए मुस्लिम समाज से दूर जा चुका है. महीने भर रोजेदारों ने अल्लाह की रजा के लिए रोजे रखे और दिन भर भूखे प्यासे रहकर इबादत की.

जहां एक तरफ मुस्लिम समाज मे ईद की खुशी है वहीं साल भर के लिए रमजान महीने से बिछड़ने का भी दुख है. ये महीना बड़ा ही बरकत वाला था. दरगाह की शाहजहानी मस्जिद में अदा की गई.

नमाज में देश के अलग-अलग स्थानों से आए हुए जायरीन और स्थानीय लोगों ने ऐडब्कि नस्मज अदा की. दो रकात पढ़ी जाने वाली नमाज को इमाम साहब ने अदा कराई. कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नमाजियों ने बा अदब नमाज अदा की. नमाज के बाद दरगाह में मौजूद लोगों के हजारों हाथ देश मे अमन चैन, भाईचारे की दुआ के लिए उठे. बाद में सभी लोगों ने एक दूसरे के गले मिलाकर ईद की मुबारकबाद दी.