नैनीताल

पीक टूरिस्ट सीजन में इस साल नैनीताल, मसूरी के निवासी गुस्से से लाल-पीले हो रहे हैं। शहर की सड़कों पर लग रहे भीषण जाम के चलते लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा है। आंकड़ों के मुताबिक, हर दिन 1,000 वाहन हिल स्टेशन में प्रवेश कर रहे थे, जो 2,000 हुए। इसके बाद वीकंड्स में यह संख्या 10,000 हो गई है।

परिणाम यह हुआ है कि 'जीवन के मजे लेने' आ रही भीड़ ने यहां के निवासियों को अपने ही शहर में कैद करके रख दिया है। तल्लीताल और मल्लीताल के बीच स्थित मॉल रोड पर हालत और भी दर्दनाक हो जाती है। स्थानीय निवासी नवीन तिवारी के मुताबिक, 'जब मॉल रोड बंद हो जाती है, साइड रोड्स पर जाम झेलना पड़ता है। रूट डायवर्जन भी कर दिया जाता है, जिससे परेशानी उठानी पड़ती है।'

मुख्य सड़कों के अलावा जो सड़कें एनएए-87 से रामपुर को नैनीताल से जोड़ती हैं, अक्सर ही जाम रहती हैं। हलद्वानी से नैनीताल पहुंचते वक्त अब कई बार 5-6 घंटे तक लग जाते हैं, जो कि महज 1-2 घंटे की दूरी है।

मसूरी में भी हालात कोई ज्यादा बहेतर नहीं हैं। मशहूर लेखक रस्किन बॉन्ड ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'वीकंड में घर से निकलना बेहद खतरनाक हो गया है। सड़कों पर कहीं न खत्म होने वाली कारों की कतार लग जाती है।' पिछले महीने उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मिनी बसों की एंट्री शहर में बैन की थी, जिससे कुछ राहत मिली भी थी, लेकिन फिर से हालात जस के तस हो गए हैं। शहर को बाहर से लगातार प्रवेश कर रहीं प्राइवेट गाड़ियों से जूझना पड़ता है।

वह कहते हैं कि ट्रैफिक जाम के चलते यहां स्कूलों को 4 दिन अतिरिक्त छुट्टी देनी पड़ी। अधिकारियों ने बताया, 'जल्द इस पर कड़े कदम उठाए जाएंगे। वीकंड में यहां 10,000 टूरिस्ट तक आ रहे हैं। किसी को भी नियम तोड़ने पर बख्शा नहीं जाएगा।' वहीं, आपको बता दें कि बुधवार को तो मनाली-लेह हाईवे पर 17 घंटे भीषण जाम लगा रहा, जिसमें आने व जाने वाले लगभग 12,00 टूरिस्ट फंसे है।