हिन्दू संस्कृति में "ओम्" शब्द के उच्चारण के पीछे ध्वनी विज्ञान है ,एक लॉजिक है कि  ओम् बोलने पर ध्वनी तंरगो में विशेष उर्जा बनती है जो वायुमंडल के साथ आपके आभा चक्र को प्रभावित करती है, इसी तरह सारे मंत्र के पीछे भी यही रहस्य है जो हर धर्म में यही महत्व रखते है ... कहने का अर्थ यह है कि आपके उच्चारण, आपकी बोली आपके चरित्र को परिभाषित भी करती है और प्रभावित भी.. उदाहरण आपके अपने आसपास भी मिल जायेगें , देश की राजनीति में तो भरे पड़े है, दिग्गविजय सिंह, केजरी, लालू, ओवेसी, आदि नेताअपने बड़बोलेपन  की वजह लोगो के निशाने पर होते है, जिसका असर उनके सम्मान में कमी के रूप में नजर आता है, मनमोहन सिंह की खामोशी उनकी कमजोरी तो थी ही लेकिन सबसे बड़ी ताकत भी थी.. उटपंटाग बोलने से बेहतर है चुप रहिये.. अब बात करते है सपा नेता नरेश अग्रवाल की..कल राज्य सभा में हिंदू देवी देवताऔ को शराब के साथ जोड़कर जो बेहूदा टिप्पणी की थी, उसका असर ये हुआ की शाम तक उनको रिकार्ड तोड़ गालियां मिली, लोगों की बददुआऐं भी दुआऔं जितना ही असर करती है.. और जब ये करोड़ो लोगों की और से होती है तो कॉस्मिक एनर्जी इस पर काम करना शुरू कर देती है.. बहस ठीक है पर किसी धर्म विशेष पर ऐसी टिप्पणी गलत थी, सहिष्णु धर्म है इसलिए ये बच गये वरना ..
जिन देवताऔ का कल मजाक उड़ा रहे थे , लोग कल ही उनसे मुलाकात के इन्तजामात भी करा देते....