चोटियां काटी जा रही है, खुरापाती लोग इस देशव्यापी हवन में निरन्तर आहुतियां दे रहे है, माहौल बनाने का अलग ही मजा है,और हम भारतवासियों के लिए तो ये गजब का मनोरंजन है, सड़क पर तड़पते लोगों के विडियो बनाकर तुरंत अपलोड करना साबित करता है कि हम कितने सभ्य और जागरूक लोग है, खैर एक अदृश्य देवशक्ति का भय सबके मन में है, ये कमजोर नस है हमारी, इसी नस से हम लुट भी सकते है और चाहे तो लूट भी सकते है, सावन में कुछ लोग दोनो वक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाते है, उन्है विश्वास है कि भगवान जल की मात्रा के अनुसार अपने पाप माफ कर देते है, व्रत उपहास में अन्न त्यागकर ग्रहण किये जाने फलाहार का वजन, अन्न से दुगुना ही निकलता है,  शायद ईश्वर को भी अन्न से आब्जेक्शन है, चटपटी साबुदाने की खिचड़ी  पाप मुक्ती में सहयोग करती है.. खैर चोटी काट गिरोह लगभग इसी तरह का गिरोह है, जो अदृश्य शक्ति में यकिन रखता है, ये अलग तरह का मनौविज्ञान है जो, साबुदाने की खिचड़ी खाने से समझ नहीं आता है। थोड़ा विज्ञान भी जरूरी है,  खैर समय समय पर चमत्कार गढ़े जाते है, यहां कभी देव दूध पीते है, कभी सांप दर्शन देकर पर्च छपवाने को कहते है.. फिलहाल चोटियां कटने का सीजन है, हिन्दुस्तान है, लोग चोटियां कटने पर माहौल बना रहे है, लोग मौका पड़ने पर यहां एक दूसरे के पांव तक काट सकते है .. पर पांव पर नजर कहां जाती है नींव के पत्थर है पांव , चोटी शीर्ष पर है.. सबकी नजर रहती है.. सो चोटी चर्चा में है।
खैर, ये सब इंडिया का दूसरा पहलु है .. बाकी यूं हम विश्व में अपनी धाक जमाये है..
डिजिटल इंडिया के नाम से...
जय डिजिटल इंडिया...
जय जय डिजिटल इंडिया..