कृषि वैज्ञानिकों के दल ने की पड़ताल किसानों को दी सलाह
रायसेन।
मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानुसार आगामी पांच दिनों में मध्यम घनेबादल व हल्की बारिश होने का अनुमान है। मौसम के खुलते ही सोयाबीन, मूंग व उड़द में पीला मोजेेक रोग की संभावना है। जिले में इस समय खरीफ फसलों में सोयाबीन, मूंग, उड़द,अरहर,मक्का व धान की फसल लगी हूई है, जिसम ेंसोयाबीन की फसल में गर्डलबीटल, हरी अद्र्ध कुण्डलक इल्ली का आरम्भिक प्रकोप देखा जा रहा है।
पीला रोग विषाण जनितरोग:-पीला मोजेक रोग-सोयाबीन का पीला मोजेक रोग एक विषाणु जनितरोग है यह रोग सफेद मक्खी से स्वस्थय पौधों पर पहुंचता है। सर्व प्रथम पौधों की नई पत्तियों पर अनियमितचमकीले धब्बों के रूप में प्रकट होता है, पत्तियों पर पीला क्षेत्र बिखरा हुआ अथवा मुख्य शिराओं के साथ पीलेपट्टी के रूप में दिखाई देता है,जैसे-जैसे पत्तियां परिपक्व होतीहैं, इनपीले क्षेत्रों में ताम्बिया रंग के धब्बे बन जाते हैं।
समय पर करें नियंत्रण:-शुरू आती अवस्था में ही पीला मोजेक ग्रसित पौधों को उखाड़ कर नष्ट करें,शुरूआती अवस्था में कीट नियंत्रण के लियेसिंथेटिक पाइराथ्राइडस का उपयोग न करें,सफेद मक्खी के नियंत्रण हेत ुथायोमिथॉक्साम12.6 प्रतिशत $ लेम्डासाइ लोथ्रिन 9.5 प्रतिशत जेड.सी. मात्रा 200 मिली/है. या एसीटामप्रिड 20 एस.पी. 200 ग्राम या इथोफेनप्रोक्स 10 ई.सी. मात्रा 1 लीटर/है. 600-700 लीटरपानीमें घोल बना कर छिड़काव करें,पिछले दिनों लगातार घने बादल युक्त एवं बौछार मय बारिश का मौसम रहने के कारण सोयाबीन, मूॅग ,उडद एवं तिल आदि में कहीं-कहीं पत्तियों पर धब्बेनुमा संरचना दिखाई दे रही है,नियंत्रण के लिए कॉपरऑक्सीक्लोराइड 2.5 से 3.0 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ बीटा साइफ्लूथ्रिन 8.49, इमीडाक्लोप्रिड 19.8 ओडी.  मिला कर छिडकाव करें,तुअर की फसल में पत्तियों पर पीले-पीले धब्बे बनकर पत्तियां सूख रही हैं, फाइटोफ्थोरा ब्लाइट रोग के बचाव हेतु मेटालेक्जिल,मैन्कोजैब 500 ग्राम/हैक्टेयर या कार्बेन्डाजिम,मेन्कोजेब 750 मिली/हैक्टेयर घोल बना कर छिड़काव करें।