बाबू स्कूल में बच्चों के सामने कर रहे धूम्रपान
ना शिक्षकों को ऐतराज न बाबूओं को शर्म
सागर।
वैसे तो धूम्रपान करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ही फिर भी समाज से यह खत्म नहीं हो पा रहा है। जिसके लिए शासन ने भी सख्त आदेश दिये है कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान न करें। लेकिन शासन के इन आदेशों को सार्वजनिक स्थान तो छोडिय़े शिक्षा के मंदिरों में भी नहीं माना जा रहा है। स्कूल में बाबू बिना संकोच के बच्चों के सामने बीड़ी के कश लगा रहे है।

इन शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को यह भी नहीं मालूम की इसका वहाँ पढऩे वालों बच्चों पर क्या असर होगा? वहीं शिक्षा विभाग के बिगड़ते हालातों को देखकर जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग जाता है कि किस तरह जिला शिक्षा अधिकारी शिक्षा विभाग को संभाल रहे है कि शालाओं में खुलेआम धूम्रपान किया जा रहा है। यह मामला सानौधा की शासकीय नेहरू उच्च. माध्य. विद्यालय का है जहाँ पदस्थ बाबू रामदास रैकवार बीड़ी के कश लगा रहे है। इतना ही नहीं यह कार्यालय में ही धूम्रपान करने से बाज नहीं आते। सामने बच्चें व शिक्षक आते-जाते रहे है। फिर भी बिना शर्म के यह बाबू बीड़ी को सुलगाए बैठे रहते है।


जिला शिक्षा अधिकार की सुस्त कार्यप्रणाली

जिले में शासकीय शिक्षण संस्थानों की हालत बद से बदतर बनी हुई है। लगातार गिरता शिक्षा का स्तर जिला शिक्षा अधिकारी की सुस्त कार्यप्रणाली की ओर इशारा कर रहा है। हालात यह है कि शहर के स्कूलों में ही भर्राशाही का आलम है। न शिक्षकों को अधिकारियों का खौफ है न ही नियम विरूद्ध कार्य करने वालों पर जिला शिक्षा अधिकारी को कार्यवाही करने में रूचि। जिसके कारण बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। ताजा मामला शासकीय हाई स्कूल चमेली चौक का है। जहाँ पूरी क्लास के लिए शिक्षकों द्वारा सजा दी गई लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मामले पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। वहीं दूसरी ओर सानौधा की स्कूल का मामला है जहाँ स्कूल में कार्यरत बाबू कार्यालय में धूम्रपान करते घूमते है। ऐसे में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा बिगड़ती व्यवस्था पर मौन रहना चिन्ता का विषय है।


निजी विद्यालयों में ले रहे अधिक रूचि
शासन का उद्देश्य है कि शासकीय विद्यालयों की शिक्षा का स्तर सुधरे लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी शासकीय विद्यालयों का स्तर सुधारने की अपेक्षा निजी विद्यालयों में अधिक रूचि ले रहे है। सूत्रों की माने तो जब से  जिला शिक्षा अधिकारी संतोष शर्मा ने कमान संभाली है तब से शासकीय विद्यालयों की हालत बिगड़ती जा रही है तथा निजी विद्यालयों की ओर अधिक रूझान होने के कारण इन अशासकीय विद्यालयों की हालत सुधार पर है।

सूत्रों ने तो यह भी दावा किया है कुछ लोगों के कहने पर जिला शिक्षा अधिकारी निजी स्कूलों पर शिकांजा कस रहे है। हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यक्षेत्र में सभी स्कूल आते है लेकिन फिर भी जितना ध्यान निजी स्कूलों पर दिया जा रहा है उतना ध्यान शासकीय विद्यालयों पर दिया जाये तो शिक्षा का स्तर सुधारा जा सकता है।