मवेशियो को नहीं बचे चारागाह, सड़को पर घूम रहे भूखे प्यासे
खुरई।
समीपस्थ ग्राम हनौता में सैकड़ो एकड़ सरकारी जमीन पर लोगो द्वारा कब्जा कर खेती करने से फसले तो लहलहा रही है लेकन इसके विपरीत मवेषीयो के पेट भरने लायक भी जगह न छोडऩे से उनके सामने चरवन का संकट खड़ा होने से गांव एवं षहर की सड़को पर भूखे प्यासे घूम कर दम तोड़ रहे है।

शासकीय चरोखर भूमी पर लोगो द्वारा कब्जा कर खेती करने से पशुधन के जीवन पर संकट के बादल मडऱाते दिख रहे है। स्रकारी जमीन पर बेजा कब्जाधारियो द्वारा फसल लगा देने के कारण मवेशियो को चराने के लिए चारागाह की कमी हो गई है जिसके चलते ग्रामीणो को अपने मवेशियो को घर में बांधकर रखना पड़ रहा है। कुछ ग्रामीण मवेशियो को छोड़ देते है। ये मवेशी खेतो में घुसकर फसलो को नुकसान पहुंचा रहे है।


पशुधन पर संकट के बादल
समस्या ग्राम पंचायत सतनाई के अंतर्गत आने वाले हनौता गांव की है जहां खाली पड़ी शासकीय भूमि एवं लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में फैली पहाड़ी पर कुछ लोगो को शासन से पट्टा भी प्राप्त है मगर अधिकांश लोग सरकारी जमीन पर जबरन कब्जा कर सोयावीन, उड़द एवं फलदार वृक्ष लगा लेने के कारण मवेशी के लिए चारागाह की कमी हो गई है जिसके चलते मवेशी मालिक या तो मवेशी को दिन भर घर पर बांध कर रखते है या ख्ुाला छोड़ देते है जिससे ये मवेषाी खेतो में घुसकर फसल को बर्वाद कर रहे है। शासन प्रशासन द्वारा षासकीय भूमी को बेजा मुक्त न कराने से आज पशुधन संकट के दौर से गुजर रहा है।

परिवर्तन संसार का नियम है: पूर्णमति माताजी
खुरई।
प्राचीन जैन मंदिर में आयोजित आत्मबोध ज्ञानगंगा शिविर में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए ज्येष्ठ आर्यिका पूर्णमति माताजी ने कहा कि परिवर्तन संसार का नियम है जिसे हम मृत्यु समझते हैं वही तो जीवन है। एक क्षण में व्यक्ति करोड़ों का मालिक बन जाता है, दूसरे ही क्षण में वह दरिद्र भी बन सकता है, यही तो विधि का विधान है।
आर्यिकाश्री ने कहा कि पवित्र आत्मा को स्मरण करोगे तो तुम्हारे परिवारों में पवित्रता आएगी। अपने ज्ञान को हमेशा संभालकर रखो। ज्ञान के विपरीत मान्यता वाले व्यक्ति तरह-तरह की यातना भोगते हैं। ज्ञानी व्यक्ति का यदि जवान बेटा भी मृत्यु को वरण करता है तो वह उसे ईष्वर की एक अमानत मानकर कभी दुखी नहीं होता। वह जानता है कि जिसकी जितनी आयु कर्म होता है उसे न एक सेकेंड को बढ़ाया जा सकता है और न ही घटाया जा सकता है यही तो ज्ञान की महिमा है। उन्होंने कहा कि बाहर का वातावरण शुद्ध रहेगा उतने ही परिणामों में शुद्धता आएगी। व्यक्ति की जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वैसे वैसे उसको नींद भी कम आने लगती है। 
आर्यिकाश्री ने कहा कि दर्शनार्थी गाड़ी में बैठकर आ जाते हैं और वही धोती, दुपट्टा पहनकर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, आहारदान आदि देने में कोई संकोच नहीं करते। इससे उनको ही हानि उठानी पड़ती है। भला गाड़ी में बैठने से कैस शुद्धता रह पाएगी। गाड़ी में चमड़े आदि अशुद्ध वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है, इससे हमें बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई देखे या न देखे हमारे अंदर में बैठी आत्मा तो देखकर ग्लानि से भर जाती है। देव दर्शन करने के पूर्व शुद्धता बहुत आवश्यक है।
आर्यिकाश्री ने कहा कि मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना पराया मन से मिटा दो, विचार से हटा दो फिर सब तुम्हारा है तुम सबके हो। यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो। यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाष से बना है और इसी में मिल जाएगा परंतु आत्मा अविनाषी है फिर तुम क्या हो? तुम अपने आपको भगवान को अर्पित करो, यही सबसे उत्तम सहारा है। जो इसके सहारे को जानता है वह भय, चिंता, षोक से सर्वदा मुक्त हो जाता है।
आर्यिकाश्री ने कहा कि ÓगीताÓ में इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो, किससे व्यर्थ डरते हो, कौन तुम्हें मार सकता है, आत्मा तो न पैदा होती है और न ही मरती है। जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है और जो होगा वह भी अच्छा होगा। तुम भूत का पश्चाताप न करो, भविष्य की चिंता न करो, वर्तमान में जीना सीखो। उन्होंने कहा कि तुम्हारा क्या गया जो रोते हो, तुम क्या लाए थे जो तुमने खो दिया। तुमने क्या पैदा किया था जो नाश हो गया, न तुम कुछ लेकर आए, जो लिया यहीं से लिया, जो दिया यहीं पर दिया।