एक ऐसा पौधा जिसकी छोटी-छोटी पत्तियां भी संतरे से 7 गुना ज्यादा विटामिन सी से भरी होती हैं, उनमें गाजर से 4 गुना ज्यादा तक विटामिन और दूध से चार गुना अधिक कैल्सियम पाया जाता है. औषधीय गुणों से भरपूर इस पौधे को 300 बीमारियों से लड़ने में कारगार पाया गया है.

जी हां, ये है ड्रमस्टिक यानि सहजना. राजस्थान सरकार अब इन खूबियों के चलते ही इसकी खेती को बढ़ावा देने जा रही है. बाहर से इसके उन्नत बीज मंगाए गए हैं और पौध तैयार की जा रही है और इसी पौध पर तीन महीने बाद फूल खिलने वाले हैं. प्रदेश के कुछ जिलों में पहले से ही मीठा सहजना पैदा हो रहा है और लोग सब्जी के रूप में इसका उपयोग करते रहे हैं लेकिन औषधीय उपयोग की दृष्टि से पहली बार सुनियोजित रुप से इसकी खेती होगी.

औषधीय गुणों और पोषक तत्वों से भरपूर सहजना करीब 300 बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखता है और देश-प्रदेश में इसका औषधीय उपयोग करने की राज्य सरकार की प्लानिंग है.

ड्रमस्टिक को प्रदेश में सहजना और मोरंगा के नाम से जाना जाता है और दुनिया के कई देशों में औषधीय उपयोग के लिये बड़े स्तर पर इसकी खेती होती है. अब प्रदेश सरकार किसानों की आय बढाने के मकसद से ड्रमस्टिक की खेती को बढावा देने जा रही है.

यूएसडीए के रिसर्च में गुणों का खुलासा

दुनिया के कई देशों में ड्रमस्टिक पर शोध किया है और इन शोधों में इसके चामत्कारिक औषधीय गुणों की जानकारी सामने आई है. यूएसडीए द्वारा किये गये एक रिसर्च में ड्रमस्टिक को करीब 300 बीमारियों से लड़ने में कारगार पाया गया है. सहजने को एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी कैन्सर और एंटी डायबिटीक माना गया है साथ ही अस्थि रोग, पेट से सम्बन्धित बीमारियों, मष्तिष्क से सम्बन्धित बीमारियों, डिप्रेशन और ब्लड प्रेशर आदि में भी इसके चामत्कारिक उपयोग की जानकारी सामने आई है.

संतरे से 7 गुना ज्यादा विटामिन सी

यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर द्वारा किये गये शोध के अनुसार ड्रमस्टिक की पत्तियों में संतरे से 7 गुणा ज्यादा विटामिन सी, गाजर से 4 गुणा ज्यादा विटामिन , दूध से 4 गुणा ज्यादा कैल्सियम, केले से तीन गुणा ज्यादा पोटेशियम और दही से दो गुणा ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है. इतना ही नहीं विटामिन बी वन, विटामिन बी टू और विटामिन बी थ्री के साथ ही कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम, मैगनीज, फॉस्फोरस और जिंक जैसे उपयोगी मिनरल्स भी इसमें पाये जाते हैं.

औषधि के साथ चारे में रूप में भी उपयोगी

 

इस्तांबुल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका जैसे देशों में न्यूट्रिशन के रुप में इसका प्रयोग होता है. बच्चों के स्वास्थ्य के लिये इसे बेहद लाभकारी माना गया है. इतना ही नहीं पशुओं के चारे के रुप में भी इसे उपयोगी माना गया है. पशुओं का वजन और दूध बढाने में यह काफी कारगर साबित होता है. रिसर्च के अनुसार ड्रमस्टिक से तैयार चारा खिलाने से पशुओं में 43 प्रतिशत तक वजन और 34 से 64 प्रतिशत तक दूध की बढोतरी हुई है.