आज देश के तमाम वो लोग आहत हुए होगें, जिन्होने दस साल की मासूम बेटी पर उसी के मामा के दुष्कर्म की खबर पढ़ी होगी, ...उस मासूम ने कल एक बेटी को जन्म दिया... ये है भारत की असली तस्वीर जिस पर बेटी बचाऔ के हजारों पोस्टर से ढक दिया गया है, .. हम आहत लोग कुछ नहीं कर सकते, और जो कर कर सकते है वो आहत नहीं है , उनके लिए यह सिर्फ एक घटना है जिसे हर घटना की तरह जांच करवाने भेज दिया जायेगा.. रिपोर्टर ,कैमरे के सामने नौटंकी वाला मुंह बनाकर बोला जायेगा कि दोषी को नहीं बक्शा जायेगा...
अखबारों का एक कौना, रोजाना ऐसे दुष्कर्म की खबर के लिए रिजर्व है.. अत्याचार, रेप, हत्या..
बेहद शर्मनाक है..अभी कल परसों ही खबर थी कि दूसरे देश में इस तरह की घटना पर दोषी को सरे आम चौराहे पर लैटा कर गोली मार दी गयी, बाद में शव को   चौराहे पर लटका दिया गया.. ये है कानून , जो वहां की बेटियों के साथ है, हमारे यहां मानव अधिकार वाले ऐसा करने नहीं देगें , वो सीना तान कर अपराधियों के साथ ज्यादा खड़े रहते है,


चौराहों पर मोमबत्तियां जलाकर हम अपने गुस्से का प्रदर्शन करेगे , जबकि चौराहो पर ऐसे लोगो को जिन्दा जलाने की जरूरत है.. लेकिन हमारा कानून ऐसे अपराधियों को सजा के बजाय सिलाई मशीनें बांटता है... हम सिर्फ अंग्रेजो से आजाद हुए है..आज  वोटों की गुलामी ने देश को बर्बाद करने की ठान रखी है.. कानून बदलने के बजाय हम नारे बदलते है, बेटी बचाऔ ,बेटी पढ़ाऔ.. देश की बेटी.. हमारी बेटी..  सब नौंटकी है ये, शर्म आती है हमें..हा, दामिनी की घटना के बाद कानून में जरूर बदलाव हुआ.. बलात्कार को दुष्कर्म का नाम दे दिया गया.. आज से ऐसी घटनाऔ को दुष्कर्म कहा जाये.. वाह ,क्या बदलाव था... बेहतर होता कि सरे आम फांसी का कानून बनता ,  इन भेड़ियों में खौफ पैदा होता..


ये सब सिर्फ उम्मीदें है हमारी ,जो पीढी दर पीढी हम देखते रहेगें ... हर चौराहो पर बेटियों के गीत बजेगें, रैलियां होगी वहीं चौराहे के पास किसी बंद कमरे में किसी मासुम की आवाज इन गीतो में खो जायेगी..
हम फिर से मोमबत्तियां जलायेगें ,गीत लिखेगें , कार्टून बनायेगें.. और ये कानून के रखवाले फिर दोहरायेगे.. दोषी को नहीं बक्शा जायेगा...


।।जय हिन्द।।

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