भीलवाड़ा के भौली गांव में एक बुजुर्ग महिला रामकन्या पर डायन का चस्पा दबंगों ने ऐसे लगाया कि उसकी जिंदगी मौत से बदतर हो गई है. महिला ने 20 दिन भूख से तड़पते हुए काल कोठरी में बिताए. अपने ही बेटों ने उसे बंद कर ताला जड़ दिया. घटना संज्ञान में आने के बाद पुलिस-प्रशासन की टीम ने उसे नरक से बाहर निकाला.

भौली गांव में एक दबंग देवीलाल की बेटी पूजा नवीं कक्षा में पढ़ती थी. पूजा बीमार हुई तो परिवार उसे तांत्रिक के पास ले गया. तांत्रिक ने कहा पूजा को एक डायन खा रही है. पूजा जिस रास्ते से स्कूल जाती थी, रास्ते में बुजर्ग महिला रामकन्या का घर आता था. रामकन्या को पूरा गांव अम्मा कहता था. 03 अगस्त को दबंगों ने रामकन्या पर आरोप जड़ा कि वो डायन है और पूजा को खा रही है.

दंबगों ने रामकन्या को जान से मारने की कोशिश की. पति भैंरुलाल ने रामकन्या की जान बचाने की कोशिश की तो पीट-पीट कर उसका सिर फोड़ दिया. रामकन्या ने किसी तरह घर में घुसकर जान बचाई. लेकिन दंबग जान लेने पर अड़ गए. परिवार को कहा रामकन्या को गांव से निकालो, नहीं तो घर जला देंगे.

दबंगों के डर से बेटों ने मां को 03 अगस्त को घर की काल कोठरी में कैद कर ताला जड़ दिया. रामकन्या को शौच के लिए भी बाहर जाने की इजाजत नहीं थी. रामकन्या ने बताय़ा कि बीस दिन से उसने कुछ नहीं खाया.

सूचना मिलने के बाद भीलवाड़ा जिला कलेक्टर के आदेश पर मंगलवार को हमीरगढ़ की एसडीएम रेणु मीणा पुलिस टीम लेकर गांव में दाखिल हुई. घर के कमरे का ताला खोलकर पीड़ित बुजर्ग महिला को कैद से मुक्त कराया. जैसे ही रामकन्या ने पुलिस को देखा उसने रोकर अपना दर्द बयां किया. वो सवाल पूछ रही थी कि उसका कसूर क्या था. वो कैसे एक बच्ची को खा रही थी. पुलिस ने दंबगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है.

 

लेकिन डायन बताकर अमानवीय अत्याचार की शिकार अकेली रामकन्या नहीं हुई. अगर आंकड़ों की बात करें तो राजस्थान में 2015 में डायन एक्ट लागू होने के बाद भी अकेले भीलवाड़ा जिले में ही अब तक 14 मामले सामने चुके हैं.