भारत में बहुत सी धार्मिक जगहों पर लोग घूमने के लिए आते है लेकिन अगर उस जगह पर देखने के लिए लोगों को कुछ मजेदार मिल जाएं तो वहां पर उनका घूमने का मजा दुगणा हो जाता है। आज हम आपको ऐसी ही एक जगह के बारे में बताने जा रहे है जहां पर चंदन की बारिश होती है। इसके अलाव मालवा क्षेत्र में स्थित मुक्तागिरी तीर्थ स्थल की खुबसूरती को देखने के लिए भी पर्यटक दूर-दूर से आते है। आइए जानते है इसके बारे में कुछ और दिलचस्प बाते।

 

मेंढागिरी पर्वत
कहा जाता है कि इस पर्वत पर 1000 वर्ष पहले मुनिराज ध्यान में मग्न थे। उनके ध्यान करते समय उनके सामने एक मेढक पहाड़ी की चोटी से गिर कर मर गया। लोगों का मानना है कि उस साधु ने मेढक के कान में ऐसे मंत्र कहे थे जिससे उसे स्वर्ग की प्रप्ति हुई। इसी के कारण अष्टमी और चोदस को यहां पर केसर और चंदन की वर्षा होती है। इसी मेढक के कारण इस पहाड़ी का नाम मेढ़ागिरी पड़ गया।

 

दूर-दूर से पर्यटक यहां पर चन्दन और मोतियो की बारिश देखने के लिए आते हैं। इस जगह को इतिहासिक तौर पर बहुत पवित्र माना गया है। इस स्थान को देखने और अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं।

 

सतपुड़ा का झरना
यहां पर पर्यटक सिर्फ मेंढागिरी पर्वत ही महीं बल्कि यहां से थोड़ी ही दूरी पर स्थित सतपुड़ा में मौजूद 250 फीट ऊंचा झरना भी देखने के लिए आते है। यहां की खुबसूरती देखकर अक्सर पर्यटक दंग रह जाते है। दूर-दूर तक फैली हरियाली और पेड़-पौधे देखकर आपका मन यहां से जाने को करेगा।

 

झरनों हरियाली के अलावा यहां पर देखने के लिए बहुत से दिव्य मंदिर है। यहां पर मौजूद 52 मंदिर जैन धर्म के दिगंबर संप्रदायक है। यहां के मंदिरों में घूमने के लिए आपको करीब 350 सीढ़िया उतरनी पड़ती है। लोगों का ऐसा मानना है कि यहां पर 600 सीढ़ियां चढ़ने-उतरने से मन की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।