नई दिल्लीः रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नोटबंदी के आंकडे जारी कर अपनी रिपोर्ट में बताया कि नोटबंदी के दौरान 1000 रुपए के 8.9 करोड़ नोट जमा नहीं हो सके वहीं इसके चलते वित्त वर्ष 17 में नए नोटों की प्रिंटिंग कॉस्ट दोगुनी से ज्यादा बढ़कर 7,965 करोड़ रुपए हो गई, जबकि वित्त वर्ष 16 में इस पर 3,421 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। आरबीआई के अनुसार मार्च 2017 तक 1000 रुपए के करीब 89 मिलियन नोट प्रचलन में थे, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 6.33 बिलियन का रहा था।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि नोटबंदी के बाद अब करेंसी डिमांड 87 फीसद के आसपास रही है। मार्च 2017 तक सालाना आधार पर 86.4 फीसद करेंसी में से 73.4 फीसद हिस्सा 500 और उससे ऊपर के मूल्यवर्ग वाले नोटों का था वहीं मार्च 2017 तक 2000 रुपए के नोट कुल सर्कुलेशन का 50.2 फीसद हिस्सा रहे थे। आरबीआई का कहना है कि उसने कैशलेस इकोनॉमी की तरफ अपने प्रयासों में तेजी दिखाई है।

नए नोट के साथ के नकली नोट भी आए सामने
आर.बी.आई. की रिपोर्ट के मुताबिक बैंकिंग सिस्टम में मार्च 2017 तक 7,62,072 नकली नोट पकड़े गए। सबसे बड़ी चिंता की बात 2000 और 500 रुपए की नई डिजाइन के भी नकली नोटों के सामने आने की है। आरबीआई के मुताबिक 2000 रुपये के नोट की नई डिजाइन के 638, और 500 रुपए के नोट की नई डिजाइन के 199 नकली नोट पकड़े गए।

करीब-करीब सारा पैसा लौटा वापिस
नोटबंदी के बाद करीब-करीब सारा पैसा बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गया है। कांग्रेस ने इसे लेकर केंद्र पर हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रह चुके पी चिदंबरम ने ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है। चिदंबरम ने अपने ट्वीट में लिखा है कि नोटबंदी के बाद 15,44,000 करोड़ के नोटों में से केवल 16000 करोड़ नोट नहीं लौटे। यह एक फीसदी है। नोटबंदी की अनुशंसा करने वाले RBI के लिए यह शर्मनाक है।