गुरुवार दी॰ 31.08.17 भाद्रपद शुक्ल दशमी को गौरी विसर्जन पर्व मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार गणेश चतुर्थी के चौथे दिन अर्थात अष्टमी पर गौरी आवाहन किया जाता है, नवमी पर गौरी पूजन का विधान है व दशमी पर गौरी विसर्जन किया जाता है। गौरी विसर्जन पर्व गौरी और गणेश के बिछड़ने का दिन माना जाता है इस दिन लोग परंपरागत रूप से देवी गौरी का पूजन कर उन्हें विदाई देते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अनुराधा नक्षत्र पर इनका आवाहन, जेष्ठा नक्षत्र पर इनका पूजन और मूल नक्षत्र पर इनका विसर्जन किया जाता है। गौरी के विधिवत व्रत-पूजन और उपाय से पारिवारिक गृहक्लेश दूर होते हैं तथा बीमारियां से छुटकारा मिलता हैं।


पूजन विधि: देवी गौरी का विधिवत पूजन करें। गौघ्रत का दीप करें, मोगरे की धूप करें, हरिद्रा से तिलक करें, पीले फूल चढ़ाएं, चने-गुड का भोग लगाएं। 108 बार यह विशेष मंत्र जपें। चना-गुड प्रसाद स्वरूप किसी विप्र को बाटें।


पूजन मुहूर्त: शाम 18:28 से शाम 19:24 तक।


पूजन मंत्र: ॐ गौर्यै गोजनन्यै नम:॥


महूर्त विशेष 
अभिजीत मुहूर्त:
दिन 11:55 से दिन 12:45 तक।


अमृत काल: रात 21:37 से रात 23:24 तक।


वर्जित यात्रा महूर्त: दिशाशूल - दक्षिण। नक्षत्रशूल - उत्तर। राहुकाल वास - दक्षिण। अतः उत्तर व दक्षिण दिशा की यात्रा टालें।

 

आज का गुडलक ज्ञान
गुडलक कलर:
पीला।


गुडलक दिशा: पूर्व।


गुडलक टाइम: दिन 14:10 से शाम 16:14 तक।


गुडलक मंत्र: ॐ महेश्वर्यै देव्यै नमः॥


गुडलक टिप: बिजनैस में सक्सैस के लिए देवी गौरी पर पीली सरसों चढ़ाएं।


गुडलक फॉर बर्थडे: सौभाग्य प्राप्ति के लिए गणपती पर बेसन के लड्डू चढ़ाएं।


गुडलक फॉर एनिवर्सरी: दंपति द्वारा गणपती पर पीले गूढ़ल के फूल चढ़ाने से गृहक्लेश दूर होगा।