मध्य प्रदेश के बालाघाट में नकली टिकट बिक्री कर रेलवे को लाखों रुपये का चपत लगाने का मामला सामने आया है. पुलिस ने एक निजी टिकट बुकिंग सेवक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया है.

रेलवे ने स्टेशन के नजदीक पूर्व पार्षद की पत्नी के नाम पर वर्ष 2013 से निजी टिकट बुकिंग सेंटर खोलने की अनुमति प्रदान की. वहां से जनसाधाण को टिकट बुकिंग सेवा का लाभ मिलता था. लेकिन दोहरा लाभ कमाने के लिये बड़े ही शातिराना तरीके से टिकट में कूटरचना की जा रही थी.

टिकट का कम्प्युटर प्रिंट निकालते समय कम दूरी के दो टिकटों के बीच टिकट बुकिंग सेवक द्वारा एक सफेद कागज लगा दिया जाता था, जिसमेंं निकलने वाली दूसरी कार्बन कॉफी कोरी निकलती थी. इसे वह अपने पास संभालकर रखता था.

जब अधिक दूरी वाले अर्थात मुंबई, दिल्ली, भोपाल, इंदौर के किसी यात्री को टिकट देने होते थे तो वह पूर्व में निकाले गए कम दूरी वाले टिकट के साथ कोरे टिकट को नए टिकट के नीचे रखकर प्रिंट ले लेता और वह दूसरे कार्बन वाले टिकट अर्थात फर्जी टिकट यात्री को देकर पूरी राशि वसुलता था.

यही नहीं रेलवे में जो ओरिजनल टिकट की राशि जमा होती थी उसे वह कैंसल कर उस राशि को भी वापस ले लेता था. इस तरह टिकट बुकिंग सेवक टिकटों की हेराफेरी में दोहरा लाभ कमा रहा था.

लेकिन 10 अगस्त को इसकी धांधली पकड़ी गई. रेलवे को टिकट बुकिंग सेवक पर शंका हुई, जिसके चलते नागपुर मंडल रेल वाणिज्य विभाग प्रबंधक और टीम ने योजनाबद्ध तरीके से रेलवे टिकट में की जा रही हेराफेरी का स्टिंग ऑपरेशन किया, जिसमें टिकट बुकिंग सेवक रंगे हाथ हेराफेरी करते हुए पकड़ाया. इसके बाद रेलवे ने उसकी सेवा निरस्त कर दी व कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करायी.