फाइनेंशियल ईयर 2017-18 के पहले तीन महीने में देश की आर्थिक ग्रोथ की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है. सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक देश का जीडीपी ग्रोथ रेट 6.1 फीसदी से गिरकर 5.7 फीसदी पर गई है. हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था का बुरा वक्त अब खत्म हो चुका है. मतलब साफ है कि आने वाले छह महीने में सरकार आर्थिक सुधार को लेकर कई बड़े कदम उठा सकती है, जिनका देश की इकोनॉमी पर पॉजिटिव असर होने की उम्मीद है. लिहाजा ये कहा जा सकता है जल्दअच्छे दिनआएंगे.

इकोनॉमी का बुरा वक्त हुआ खत्म!

कैपिटल सिंडिकेट के मैनेजिंग पार्टनर सुब्रमण्यम पशुपति ने न्यूज18इंडिया को बताया कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद का इकोनॉमी को लेकर ट्रांसफोर्मेशन (बदलाव) लगभग पूरा हो चुका है. मौजूदा वित्त वर्ष के अगले छह महीने देश की इकोनॉमी के लिए बेहतर रहने की उम्मीद है.

एडलवाइज सिक्युरिटी के विकास खेमानी कहते हैं कि जीएसटी, रेरा और नोटबंदी का असर इकोनॉमी पर शॉर्ट टर्म के लिए पड़ेगा. इकोनॉमी को लेकर अब बुरा वक्त करीब-करीब खत्म होने की तरफ है. उनका मानना है कि अगले कुछ तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर फिर से पटरी पर लौट आएगी.

आएंगे अच्छे दिन

वीएम फाइनेंशियल के हेड विवेक मित्तल कहते हैं कि देश की इकोनॉमी को लेकर अब बुरा वक्त बीत चुका है. मोदी सरकार अगले छह महीने में कई बड़े कदम उठा सकती है, क्योंकि नोटबंदी और जीएसटी से छोटे व्यापारी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. लिहाजा सरकार बड़े रिफॉर्म कर सकती है. साथ ही, आरबीआई भी ब्याज दरें घटा सकता है.

भारतीय इकोनॉमी पर भरोसा कायम

दुनियाभर के ब्रोकरेज हाउस और इकॉनोमी के एक्सपर्ट्स को भारत की ग्रोथ को लेकर भरोसा कायम है. उनका मानना है कि नोटबंदी और जीएसटी का असर अब खत्म हो चुका है. ब्रोकरेज हाउस मॉर्गन स्टेनली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल काफी मजबूत हैं. वहीं, जापान की ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का कहना है कि अगले छह महीने में भारत की आर्थिक ग्रोथ 7.4 फीसदी के आस-पास रह सकती है. हालांकि, अगले 6 महीने में महंगाई कुछ चिंता बढ़ा सकती है.

दुनिया के 4 सबसे तेज आर्थिक ग्रोथ वाले देश में भारत शामिल

 

संभावित रूप से तेज आर्थिक ग्रोथ कर रहे देशों की वर्ल्ड बैंक की लिस्ट में भारत चौथे नंबर पर है. वर्ल्ड बैंक के अनुमान के अनुसार साल 2017 में भारत की आर्थिक ग्रोथ 7.2 फीसदी रहने की उम्मीद है. इसका सबसे बड़ा कारण देश के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश को माना जा रहा है. साथ ही माना जा रहा है कि इस साल बारिश का मौसम ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और खपत को बढ़ावा देगा.