फ र्श पर बैठ रही 972 छात्राएं, कभी अव्यवस्थाओं को भी बांच ले शासन-प्रशासन
देवरी।
देवरी विकासखण्ड के गौरझामर कस्बे के एक मात्र कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल में अध्ययनरत 972 छात्राये शासन-प्रशासन की बेरूखी के चलते 32 वर्ष पुराने जर्जर एवं सीलन भरे कक्षो में फ र्श पर बैठकर अध्ययन के लिए मजबूर है। विगत वर्षो में विभाग एवं तंत्र की उपेक्षा के कारण छात्राओ की संख्या विद्यालय भवन की क्षमता से 4 गुना हो जाने के बाद भी न तो नया स्कूल भवन बन सका है न ही नये कक्षो का निर्माण हो सका है। नतीजन विद्यालय की छात्राओ को कई बार क्लास रूमो में खड़े होकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था अतिथि शिक्षको के भरोसे हैजिनकी आनलाईन नियुक्ति का इंतजार छात्राये टकटकी लगाकर कर रही है। मिले बांचे कार्यक्रम से नवाचार का संदेश दे रहा शासन कभी बालिका शिक्षा संबंधी अव्यवस्थाओ को भी बांच ले। बालिका शिक्षा के लिए जन सहयोग से बना था स्कूल देवरी विकासखण्ड के सबसे बड़े कस्बे गौरझामर में बालिका वर्ग के लिए हायर सेकेण्डरी शिक्षा के आभाव के चलते वर्ष 1985 में ग्राम के जागरूक ग्रामीणो द्वारा नई पहल प्रस्तुत करते हुए जन सहयोग से नगर के मध्यमें विद्यालय भवन का निर्माण कराया था। उक्त भवन के निर्माण के लिए प्रेरणा बनी ग्राम की गिरजा बाई पटैल द्वारा भवन निर्माण के लिए भूमि एवं 35 हजार रूपये दान राशि प्रदान की गई थी। उक्त विद्यालय भवन का लोकार्पण म.प्र.शासन के तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री चन्द्रकांत जयसवाल द्वारा किया गया था। विद्यालय में 6 कमरो का निर्माण कराया गया था।

भवन हुआ जर्जर दुर्घटना की आशंका
32 वर्ष पूर्व निर्मित हुआ शासकीय कन्या हायर सेकेण्डरी विद्यालय गौरझामर का भवन जर्जर हो चुका है। दीवारो में जगह जगह हो चुकी दरारे एवं छत से नुमाया हो रहे लोहे के सरिया भवन की जीर्ण शीर्ण स्थिति बयां कर रहे है। विद्यालय के 2 कक्षो में खपरेल जर्जर होने के कारण पन्नी लगाकर सिर ढँकने का इंतजामकिया गया है। शाला भवन का फर्श भी जगह जगह उखड़ा हुआ है जिस पर बैठकर बालिकाये विद्या अध्ययन को मजबूर है। विद्यालय की कक्षाये खुली दहलानो से संचालित हो रही है। जगह की कमी के चलते खड़े होकर अध्ययन करती है छात्राये विद्यालय में कुल कक्षा 9 से 12 तक 972 छात्राये अध्ययनरत है।

जगह की कमी के चलते विद्यालयप्रशासन द्वारा उनका अध्यापन कार्य 2 शिफ्टो में संपन्न कराया जाता है। पहली शिफ्ट में हायर सेकेण्डरी कक्षाये संचालित होती है जिसकी कक्षा 11 एवं 12 के 4, 4 वर्ग होने के कारण अध्यापन कार्य प्रभावितहोता है। विद्यालय में प्रयोगशाला के लिए स्थान न होने के कारण समस्त प्रायोगिक कार्य शाला परिसरमें ओपन ग्राउंड में संपन्न होते है। विद्यालय की दूसरी शिफ्ट में कक्षा 9 एवं 10 के 6 वर्गो की 446 छात्राये फ र्श पर बैठकर अपना अध्ययन कार्य पूर्ण करती है। विद्यालय प्रशासन के अनुसार विद्यालयमें प्रत्येक वर्ग में लगभग 70 से अधि छात्राये है कक्षो में निर्धारित स्थान होने के कारण फर्श पर क्लासे लगाई जाती है। छात्राओ ने बताया कि क्लास रूम की क्षमता से अधिक छात्राओ के स्कूल पहुँचनेपर या तो वह खड़े होकर अपनी पढ़ाई करती है या फिर शिक्षक उनसे घर जाने के लिए कह देते है।विद्यालय में जगह के आभाव के कारण खेल गतिविधियों सहित अन्य गतिविधिया पूर्णत: शून्य बनी हुई है।


पूर्व में आई भवन की राशि वापिस हुई
गौरझामर कस्बे में कई वर्षो से जगह की कमी से जूझ रही बालिकाओ की इस समस्या को लेकर
स्थानीय जागरूक जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन की जागरूकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शासन द्वारा विद्यालय भवन निर्माण के लिए जारी की गई 89 लाख रूपये की राशि स्थान न बतायेजाने के कारण लेप्स हो गई। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक विद्यालय भवन निर्माण के लिए पुन: कार्रवाई
की गई है परंतु वह कब तक परवान चढ़ सकेगी इसका जबाब उनके पास भी नही है।


अतिथियो के भरोसे है हायर सेकेण्डरी की पढ़ाई
गौरझामर कस्बे में पिछले 35 वर्षो से शासन द्वारा बालिका शिक्षा के लिए संचालित इस विद्यालय में हायर सेकेण्डरी कक्षाओ का संपूर्ण शैक्षणिक कार्य अतिथि शिक्षको के भरोसे है। विद्यालय में विगत वर्षो में किसी भीनियमित शिक्षक को नियुक्त न किये जाने के कारण विद्यालय में प्रतिवर्ष अध्यापन व्यव्स्था के लिए 8 अतिथि शिक्षको को नियुक्त किया जाता है। शासन एवं विभाग की उच्च स्तरीय नीतियो के कारण अतिथिशिक्षको की नियुक्ति में बिलंब का खामियाजा अध्ययनरत छात्राये को उठाना पढ़ता है इस दौरान इनकक्षाओ में शैक्षणिक कार्य पूर्णत: ठप रहता है। इस वर्ष भी अतिथि की नियुक्त न हो पाने के कारण पूर्वसे कार्य कर रहे अतिथियो से शपथ पत्र लेकर अध्यापन कराया जा रहा है।


इनका कहना है....
गौरझामर स्कूल की समस्या गंभीर है इस संबंध में नये भवन की प्रत्याशा है। अभी 6 कक्षो के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजे गये है। विद्यालय में स्थाई शिक्षक न होने के कारण पूर्व से कार्य कर रहे अतिथियो से सहयोग लेकर शैक्षणिक कार्य आरंभ कराया गया है।
शिवराम ढिमोले विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी देवरी
विद्यालय के भवन के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी विभागीय अधिकारियों एवं जिला कलेक्टर महोदय कोभेजी गई थी पीडब्लूडी से इंजीनियर भी आये थे परंतु मरम्मत के लिए अभी तक कोई आवंटन नही आया है।विद्यालय में जगह की भारी कमी है परिसर में कक्षो के निर्माण के लिए भी कोई स्थान नही है, नये भवन के निर्माण की मांग कई बार की जा चुकी है। स्थान के आभाव के कारण खेल गतिविधिया कम ही होती है।प्रयोगशाला के लिए स्थान नही है।
जी.पी. आठया प्राचार्य
विद्यालय में भवन समस्या की जानकारी मुझे ज्ञात नही है। शैक्षक्षिक समस्या संबंधी समस्या जरूर मेरेसंज्ञान में आई थी जिसको लेकर मैने बीईओ एवं डीईओ को स्थिति से अवगत कराया था। मैं स्वयंविद्यालय का निरीक्षण कर समस्या निराकरण के लिए प्रयास करूंगा।
राहुल पाण्डे मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत देवरी
पंचायत क्षेत्र में स्कूल भवन निर्माण के लिए भूमि का आभाव नही है, शासन यदि भवन निर्माण के लिए राशि जारी कर दे तो पंचायत द्वारा प्राथमिकता के आधार पर भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराई जायेगी।
श्रीमति जनकरानी करण सिंह सरंपच