पानी की कमी के चलते बनी अजीब स्थिति, पीएचई विभाग बना लापरवाह
रायसेन।
जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित राजीव नगर(पीपल खिरिया) में पानी की कमी के चलते ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन पीएचई विभाग के अधिकारी लापरवाह बने हुए है। राजीव नगर में हालात दिनों दिन बिगड़ते जा रहे है। पानी की कमी के चलते ग्रामीणों को खुले में शौच जाने को मजबूर तक होना पड़ रहा है। जबकि पंचायत द्वारा हितग्राहियों के घरों में शौचालय निर्माण करवाया जा चुका है।
सरपंच द्वारा कई मर्तबा पीएचई विभाग को आवेदन लिखे जाने के बाद भी पीएचई विभाग द्वारा पंचायत में पानी की व्यवस्था किए जाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी तरह जिले में कई पंचायतों की स्थिति भी इसी तरीके की निर्मित हो गई है। जहां शौचालयों का निर्माण तो हो गया है लेकिन पानी की व्यवस्था किए जाने के लिए जिला पंचायत के अधिकारी भी गंभीर नजर नहीं आ रहे है। जबकि जिले में बड़े पैमाने पर खुले में शौच करने वालों के खिलाफ जिला पंचायत के अधिकारी कार्रवाई किए जाने के बाद वाहवाही तो लूट रहे है। लेकिन जिन पंचायतों में पानी की समस्या है वहां पर ग्रामीणों को पानी मुहैया कराए जाने के प्रयास तक नहीं किए जा रहे है।


आदर्श गांव की कवायद में राजीव नगर
जानकारी के अनुसार राजीव नगर को आदर्श गांव घोषित किया जाना है। लेकिन पानी की कमी के चलते आदर्श गांव होने वाले राजीव नगर के ग्रामीणों को तरसना पड़ रहा है। जबकि यह गांव रायसेन भोपाल हाइवे पर स्थित है और प्रतिदिन अधिकारियों का इसी मार्ग पर आना जाना बना हुआ रहता है। लेकिन इसके बाद भी इस गांव की सुध अधिकारियों द्वारा नहीं ली जा रही है।
जिससे ग्रामीणों में रोष बढ़ता जा रहा है। गांव की करीब 6500 की आबादी को 1 हैंडपम्प के भरोसे ही रहना पड़ रहा है।


आवेदनों का लगा ढेर
ग्राम सरपंच श्रीमती सविता ग्वाला ने बताया कि राजीव नगर में पानी की समस्या को लेकर कई मर्तबा पीएचई के अधिकारियों को शिकायती आवेदन दे चुके है। लेकिन इसके बावजूद भी अब तक पीएचई के अधिकारियों द्वारा पानी को लेकर कोई व्यवस्था गांव में नहीं की गई है। ग्राम सरपंच द्वारा 05 अपै्रल 2016, 31.
07.2017 के अलावा कई बार शिकायती आवेदन किए गए है। हद तो जब हो गई जब  मुख्यमंत्री से भी शिकायत किए जाने के बाद भी अधिकारियों द्वारा नल जल योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए दिलचस्पी नहीं दिखाई गइ। जबकि जन भागीदारी से 35000 हजार रूपए की राशि पीएचई में जमा किए जाने के बाद वर्ष 2012 स्वीकृत हुई 35 लाख रूपए की नल जल योजना का काम में पीएचई विभाग द्वारा जमकर हेरा फेरी की गई और वर्तमान में नज जल योजना सिर्फ शोपीस बनकर रह गई है।


इधर नल जल पर कागजों में चर्चा, उधर पानी को तरसे ग्रामीण
जिले में फर्जी आंकड़ों की बाजीगिरी में माहिर पीएचई विभाग के अधिकारी भारत सरकार की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी सतकर्ता एवं मूल्यांकन समिति में  फर्जी आंकड़े कई बार परोस चुके है और अब कागजों मेंं वर्तमान में नल जल योजना पर कार्यशाला का दौर पीएचई द्वारा शुरू कर दिया है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में पीएचई के अफसर कार्यशाला में नल जल योजना के प्रबंधन की दुहाई दे रहे थे। वहीं उधर गांवों में ग्रामीण बूंद बूंद पानी को तरसते हुए नजर आए।