डॉ. प्रकाश कोठारी

सवाल:
क्या मैं वायग्रा ले सकती हूं या फिर मेरे लिए कोई दूसरा विकल्प है? -एक पाठिका

जवाब: जब टेस्ट के तौर पर औरतों को वायग्रा दी गई तो उससे कोई फायदा नहीं हुआ था। दरअसल, महिलाओं में सहवास के चार चरण हैं: 1. कामेच्छा या ख्वाहिश, 2. ल्यूब्रिकेशन (उत्तेजना का बैरोमीटर), 3. प्रवेश, 4. क्लाइमेक्स या चरमसीमा

इन चार चरणों में कहीं भी गड़बड़ी हो तो उसका कारण ढूंढकर उसका सही इलाज किया जा सकता है। वहीं, पुरुषों में कामेच्छा के बाद प्रवेश के लिए प्राइवेट पार्ट में सही तनाव का होना जरूरी है। अगर तनाव ठीक से नहीं आए तो वायग्रा की गोली उसे ठीक करने में सहायता करती है। मिसाल के तौर पर अगर किसी को 25 फीसदी तनाव आया हो तो यह गोली उसे बढ़ाकर 95 फीसदी तक आसानी से ले जा सकती है।

यह गोली भूखे पेट बेहतर असर करती है। सीधे शब्दों में कहें तो यह गोली पुरुषों के लिए फायदेमंद है लेकिन महिलाओं के लिए किसी काम की नहीं। अगर किसी महिला की ख्वाहिश कम रहती है तो उसका मानसिक कारण भी हो सकता है और शारीरिक कारण भी। इसकी जड़ तक जाकर इलाज किया जा सकता है।