छ्ठी इंद्रिय का जाग्रत होना

छ्ठी इंद्रिय का जाग्रत होना व्यक्ति के आध्यात्मिक होने की निशानी है लेकिन हर व्यक्ति को अपने इन गुणों का पता नहीं होता। आप भी जरूर ऐसे कुछ लोगों से मिले होंगे जो कहते मिलेंगे कि उन्हें कुछ बुरा या अच्छा होना उन्हें पहले ही पता चल जाता है या...ऐसे लोग भी मिले होंगे जो कहते हों कि रात या दिन किसी भी समय में देखे हुए उनके ज्यादातर सपने सच होते हैं।

हो सकता है कि उनकी बातों को उनके दिमाग का फितूर समझकर आप अनदेखा कर दिया करते हों, लेकिन वास्तव में यह उनकी मानसिक क्षमता की एक विशिष्ट खूबी की ओर इशारा करता है। शास्त्रों में छठी इंद्रिय को देव मानव से जोड़कर देखा गया है, और अध्यात्म बड़े सम्मान से इसे ‘दूरदर्शी दृष्टि’ होना कहता है।

जिनकी छ्ठी इंद्रिय जाग्रत होती हैं वे कोई साधु-संत या तपस्वी नहीं होते, ऐसे व्यक्ति बातचीत और गुणों में अद्भुत अवश्य होते हैं लेकिन आम जीवन में वे सामान्य मनुष्य की तरह ही होते हैं। कई बार इन्हें खुद अपनी इस विशिष्टता क ज्ञान नहीं होता और अपनी ही बातों को पागलपन समझते हैं.... तो कैसे पता चले कि किसी व्यक्ति की छाठी इंद्रिय जाग्रत हैं?

सिक्स सेंस जाग्रत होने की प्रक्रिया

सिक्स सेंस जाग्रत होने की भी एक प्रक्रिया होती है। बहुत कम ही यह जन्मजात गुण होता है और अधिकांश मामलों में किसी खास उम्र में जाकर पैदा होता है। इसके जाग्रत होने की कोई उम्र सीमा भी नहीं होती, अलग-अलग मनुष्यों में यह अलग-अलग होता है। लेकिन इतना अवश्य है कि इसकी जाग्रत होने की प्रक्रिया सामान्य नहीं होती।

ऐसा व्यक्ति खुद में और उसके आसपास के लोग भी उसमें आ रहे इन बदलावों को महसूस कर सकता है। आगे हम वो 11 लक्षण बता रहे हैं जो बताता है कि आपमें छ्ठी इंद्रिय जाग्रत हो रही हैं या वह पहले ही जाग्रत हो चुकी है।

लोगों और आस-पास के माहौल के लिए अचानक अत्यधिक संवेदनशील होना

जो व्यक्ति पहले से मिलनसार और सक्रिय था, अचानक उसे महसूस हो कि वह भीड़ भरे माहौल में नहीं रह सकता। उसे ऐसी जगहों पर घुटन होने लगती है। यह इस प्रक्रिया की पहली अवस्था और लक्षण है जहां आप खुद को सामाजिक रिश्तों से दूर करने लगते हैं।

मानसिक क्षमता और जागरुकता में वृद्धि

दूसरे लक्षण के अनुसार आपकी मानसिक क्षमता और जागरुकता में वृद्धि होने लगती है जिससे दूसरों के मन के विचारों और भावनाओं को पढ़ने और समझने की क्षमता बढ़ जाती है। ऐसे में आप यह भी सोचने लगते हैं कि सामने वाला भी आपके विचार पढ़ सकता है और यह सोच-सोचकर आप विचलित होने लगे हैं।

कुछ लोगों या वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा की अत्यधिक संवेदनशीलता

पहले जो लोग करीब थे अब आपको उन्हें भी बर्दाश्त करने में परेशानी हो रही है। आपमें आई यह नई भावना या संवेदनशीलता आपको चिंतित और परेशान करने लगती है। आप जानने की कोशिश करते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है पर इसे समझने में असमर्थ हैं।

लंबे समय के लिए निष्क्रिय महसूस करना

उच्च आयाम को प्राप्त करने की प्रक्रिया में आपका मस्तिष्क भी अपनी चेतना को निचले स्तर से उपरी स्तर पर ले जा रहा होता है। यह एक धीमी प्रक्रिया होती है जो आपमें निष्क्रियता पैदा करता है। आप ज्यादा से ज्यादा अकेले रहना चाहते हैं। ऐसे में आप अगर सक्रिय और कामकाजी हैं तो आपको परेशानी महसूस होगी।

अन्य कारणों द्वारा मानवता के नष्ट हो जाने की चिंता सताना

इस प्रक्रिया के दौरान बहुआयामी चेतना मस्तिष्क के सभी हिस्सों में अपनी पहुंच बनाने लगता है जिसमें चिंता और भय का हिस्सा भी शामिल है। इसलिए हमारे अंदर सामाजिक या पर्यावरण संबंधी संकटों द्वारा अपने अस्तित्व के साथ-साथ दूसरों के अस्तित्व के खत्म हो जाने का भय सताने लगता है।

हर चीज को समझने का जुनून

क्रिस्टल मानव बनने की प्रक्रिया के दौरान आपकी मनोदशा आपके नियंत्रण से बाहर होने लगती है। आपको पागल होने का डर सताने लगता है। केवल इतना ही नहीं, आप भविष्य की परेशानियों को सोच-सोच कर भी परेशान होने लगते हैं।

बिना किसी कारण अवसाद

इस प्रकिया के दौरान चेतना पुरानी ऊर्जाओं को मुक्त करती है। ऐसे में संभव है आपको कुछ परिस्थियां याद कर निराशा और हताशा का अनुभव हो। बस धैर्य के साथ अपने शरीर से उन ऊर्जाओं को मुक्त होने दें और इस अवस्था के गुजरने का इंतजार करें।

सोने में परेशानी या बार-बार नींद खुलना

उच्च आयाम दिन की बजाय रात को अधिक सक्रिय रहता है और इसका असर आपकी नींद पर पड़ता है। इस समय चेतना नये चक्रों को अपने अनुकूल बनाने का प्रयत्न करती है।

इस अवस्था में आपको अजीब विद्युत तरंगें, सौर एवं चंद्र लहरें, ब्रह्मांडीय तरंगें और गांगेय केंद्र से उत्पन्न ऊर्जा का अनुभव हो सकता है। दरअसल क्रिस्टल मानव शरीर अविश्वनीय रूप से संवेदनशील होते हैं जिसके कारण ऐसा अनुभव होता है।

अशुद्धियां खत्म होने के दौरान मिलने वाले अनुभव

क्रिस्टल बॉडी सभी अशुद्धियों और विषैले प्रभावों का त्याग कर देता है। यह अलगाव की अंतिम अवस्था होती है जिसमें मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक सभी प्रकार की अशुद्धियों का त्याग करना होता है और यह शरीर के माध्यम से ही होता है। इसलिए इसके पश्चात् आपको मोटापा, सिर दर्द, कंधे और गर्दन में दर्द, अत्यधिक थकान या जोड़ों में दर्द का सामना करना पड़ सकता है।

भूख और वजन का बढ़ना

इस प्रक्रिया के दौरान शरीर को बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए आपको बार-बार भूख लगती है और आपका वजन भी अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है।

दूसरी अन्य शक्तियों को महसूस करने और देखने की क्षमता

अगर आप अन्य शक्तियों के अस्तित्व से अंजान है, तो यह प्रक्रिया आपके लिए भयानक हो सकती है। इस अवस्था मंं आप दूसरी अन्य शक्तियों जैसे आत्मा, देव या स्वर्गदूतों से बात करने में सक्षम हो पायेंगे।