सचिन मल्होत्रा/ज्योतिषाचार्य

जन्म कुंडली में राहु-केतु के मध्य में सभी ग्रहों के आ जाने को कुछ ज्योतिषी काल-सर्प योग की संज्ञा देते हैं, किन्तु वास्तविकता यह है कि कालसर्प योग का ज्योतिष के किसी प्रामाणिक शास्त्रीय ग्रन्थ में वर्णन है ही नहीं! बृहत् पराशर होरा-शास्त्र , बृहत् जातक , सारावली ,फलदीपिका, जातक-पारिजात , सर्वाथचिन्तामणि , जैमिनी-सूत्रम् आदि ज्योतिष के प्रामाणिक प्राचीन ग्रंथो में कालसर्प योग का कोई उल्लेख नहीं मिलता।

कालसर्प योग ने कैसे लोगों को जकड़ लिया
इसके अतिरिक्त भृगु पद्धति और नाड़ी ज्योतिष की पांडुलिपियों में जहां हजारों जन्मकुंडलियो का संग्रह है उनमें भी कालसर्प योग का कोई उल्लेख अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। तो सवाल यह उठता है कि विगत कुछ दशकों में कालसर्प योग ने कैसे लोगों को जकड़ लिया है।

कालसर्प योग का सच
वाराणासी की प्रसिद्ध 'बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी' के ज्योतिष विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर विनय कुमार पाण्डेय ने इस विषय पर वर्ष 2014 में एक शोध-पत्र लिखा था। उनका यह शोध-पत्र अन्तर्राष्ट्रीय शोधपत्रिका 'नैसर्गिकी' में प्रकाशित हो चुका है। प्रोफेसर पाण्डेय ने अपने शोधपत्र में कालसर्प योग के वजूद को सिरे से खारिज कर है। कालसर्प योग को नकारने में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के सेवानिवृत अध्यक्ष प्रोफेसर रामचन्द्र पाण्डेय और ज्योतिष विभाग के वर्तमान अध्यक्ष प्रोफेसर चंद्रमौलि उपाध्याय सहित अनेक बड़े विद्वान ज्योतिषी शामिल हैं।

प्रसिद्ध लोगों की कुंडली में कालसर्प
इनके अलावा प्रसिद्ध ज्योतिषी श्री के.एन. राव कहते हैं कि, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू, इंग्लैंड की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रहीं मार्गरेट थैचर, अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश आदि अनेक प्रसिद्ध व्यक्तियों की कुंडलियों में राहु-केतु के मध्य में सभी ग्रह थे, जिसे कुछ ज्योतिषी कालसर्प योग की संज्ञा देते हैं। किन्तु फिर भी वह सभी अपने जीवन में बड़ी उपलब्धियों को पाने में सफल हुए।

ग्रंथों में कालसर्प योग
अतः राहु-केतु के मध्य ग्रहों की स्थिति किसी व्यक्ति के उत्थान को रोक नहीं सकती यदि उसकी कुंडली में इससे सम्बंधित योग मौजूद हैं। इसलिए कालसर्प योग नाम की भ्रान्ति जो अभी कुछ दशकों से फैलाई जा रही है से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि इस योग का ज्योतिष के किसी प्रामाणिक ग्रन्थ में कोई उल्लेख नहीं मिलता है l

कालसर्प योग के उपाय का सच
नागपुर के पास स्थित त्र्यंबकेश्वर नामक तीर्थस्थल में कालसर्प योग की शांति के लिए हर दिन बड़ी संख्या में लोग आते है। यहां कालसर्प योग की शांति के लिए 'नारायण-नागबलि' और 'त्रिपिंडी-श्राद्ध' करवाया जाता है। दरअसल ये कलसर्प की शांति का उपाय न होकर 'काम्य श्राद्ध' हैं। यह मुख्यतः मनुष्य की अपूर्ण-इच्छा व कामना को पूर्ण करने हेतु उसके पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए सम्पन की जाने वाली कर्म-कांड की शास्त्रीय विधि है। यानी कुल मिलाकर देखा जाए तो कालसर्प नाम के योग से किसी भी तरह से डरने की जरूरत नहीं है।