देश में सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं को बढ़ावा दे रही है, वहीं मध्य प्रदेश का एक हिस्सा ऐसा भी है, जहां एक समुदाय विशेष की बेटियां जिस्मफरोशी के लिए मजबूर हैं. यहां बेटियों को खुद माता-पिता जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल देते हैं.

तमाम कुरीतियों के बीच एक पुलिस अफसर अब ऐसी बेटियों के लिए मसीहा बनकर आया है. यह अफसर बेटियों को जलालत से बचाने के लिए उन्हें शिक्षित करने और रोजगार से जोड़ने के लिए विशेष पहल कर रहा है.

दरअसल, राजस्थान से सटे सीमावर्ती जिलों में स्थित बांछड़ा समुदाय के डेरों पर वेश्‍यावृति का खुला खेल चलता है. नीमच, मंदसौर और रतलाम जिले के 65 गांवों में जिस्‍मफरोशी के ऐसे 250 अड्डे हैं. देश का यह इलाका जिस्मफरोशी के लिए बदनाम है. यहां मां और पिता के सामने बेटी अलग-अलग मर्दों के साथ रिश्ते बनाती है. कई बार तो खुद मां-बाप अपनी बेटी के लिए पार्टनर खोजते हैं.

बांछड़ा समाज के डेरों की कई लड़कियां हैं जो देह व्यापार के इस दलदल से बाहर आना चाहती हैं लेकिन दहशत के कारण को घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं. सरकारों ने सदियों से जिस्मफरोशी से जुड़े इस समाज को इस दलदल से बाहर निकालने के लिए योजनाएं तो कई बनाईं, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है. ऐसे में अब बांछड़ा समुदाय पर लगे इस कलंक को मिटाने और समाज की युवक-युवतियों को नयी राह दिखाने के लिए नीमच एसपी तुषारकांत विद्यार्थी ने पहल की है.

किसान आंदोलन के बाद हुए फेरबदल में नीमच एसपी के रूप में पदस्थ हुए तुषारकांत विद्यार्थी ने पहले बांछड़ा समुदाय की समस्या को जाना. अब वह स्वयंसेवी संगठनों की मदद से बांछड़ा बस्तियों का माहौल बदलने की कवायद कर रहे हैं.

युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने को लेकर वह प्रशिक्षिण शिविर का आयोजन कर रहे है. पुलिस के इन शिविरों में बाछड़ा समाज के युवा भी काफी जुड़ रहे हैं.

एसपी खुद बांछड़ा समुदाय की बस्तियों में जाकर युवक-युवतियों को पढ़ाने के साथ उन्हें किताबें भी उपलब्ध करा रहे है. वहीं, बांछड़ा समुदाय के लोगों को बच्चों को पढ़ाने और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए एसपी जागरुकता अभियान चलाए हुए है.

एसपी तुषारकान्त कहते हैं, 'नीमच जिले में बांछड़ा समुदाय के युवक-युवतियां गलत कार्यों में लिप्त है. जिन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पहल की जा रही है. समाज के 10वीं और 12वीं पास पास युवक-युवतियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने के लिए प्रशिक्षण शिविर लगा कर उन्हें पढ़ाया जा रहा है.'

एसपी ने बताया की हमारे एक्सपर्ट पढ़ाने के साथ ही क्लास टेस्ट भी ले रहे है, जिससे अच्छे पढ़ने वालो को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बेहतर तरीके से कराई जा सकें. वहीं जो शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा नहीं कर पा रहे है या नहीं कर पाए है उन्हें बैंक अधिकारियो से बात कर स्वरोजगार से जोड़ने को लेकर निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा. साथ ही नाबालिग लड़कियों को देह व्यापार से बचाने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है.

-भारतीय समाज में आज भी बेटी को बोझ समझा जाता हो, लेकिन बांछड़ा समुदाय में बेटी पैदा होने पर जश्न मनाया जाता है.
-बेटी के जन्म की खूब धूम होती है, क्योंकि ये बेटी बड़ी होकर कमाई का जरिया बनती है.
-इस समुदाय में यदि कोई लड़का शादी करना चाहे तो उसे दहेज में 15 लाख रुपए देना अनिवार्य है.
-इस वजह से बांछड़ा समुदाय के अधिकांश लड़के कुंवारे ही रह जाते है.
-काले सोने यानि अफीम के लिए बदनाम इस अंचल में दिन की बजाए रात ज्यादा गुलजार होती है.
-रतलाम, नीमच और मंदसौर से गुजरने वाले हाईवे पर बांछड़ा समुदाय की लड़कियां खुलेआम देह व्यापार करती हैं.
-बांछड़ा समुदाय की उत्पत्ति कहां से हुई, यह कुछ साफ नहीं है. माना जाता है कि करीब 150 साल पहले अंग्रेज इन्हें नीमच में तैनात अपने सिपाहियों की वासनापूर्ति के लिए लाए थे. इसके बाद ये नीमच के अलावा रतलाम और मंदसौर में भी फैलते गए.

बांछड़ा समाज के उत्थान को लेकर चल रहे एनजीओ नई आभा चेतना के सदस्य आकाश चौहान ने पुलिस कप्तान की युवाओं को रोजगार से जोड़े जाने की पहल को समाज सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है. उन्होंने कहा कि अब तक सरकार ने योजनाएं तो कई बनाईं, लेकिन पहली बार जमीनी स्तर पर कुछ काम होते दिख रहा है.