कलाकार : अर्जुन रामपाल, राजेश श्रिंगारपुरे, निशिकांत कामत, ऐश्वर्या राजेश, आनंद इनागले, फरहान अख्तर
निर्देशक : आशिम अहलूवालिया
मूवी टाइप  : Biopic

अवधि : 2 घंटा 15 मिनट

 

कहानी: 70 के दशक में मिल मजदूरों वाली मुंबई की दगड़ी चॉल में रहने वाला अरुण गुलाब गवली ( अर्जुन रामपाल) खूंखार डॉन बन जाता है और बाद में वह एक पॉलिटिशन बन जाता है। अरुण गवली अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का प्रतिद्वंद्वी था।

रिव्यू: मुंबई के लोग अरुण गवली के बारे में सब जानते हैं कि किस तरह एक मिल मजदूर का बेटा फिरौती, जुआ और हत्याओं के जरिए रातोंरात अंडरवर्ल्ड का जाना-माना चेहरा बन जाता है। जिन लोगों को अरुण गवली के बारे में नहीं पता है उन्हें यह फिल्म बॉम्बे के कुख्यात अंडरवर्ल्ड गैंग के बारे में बताती है। अरुण अपने दो दोस्तों बाबू (आनंद) और रामा (राजेश) के साथ मिलकर बीआरए गैंग बनाता है और 70 से 80 के दशक तक मध्य मुंबई के इलाके का बेताज बादशाह बन जाता है। गवली का उदय ही उसे दाऊद इब्राहिम का दुश्मन बना देता है। फिल्म में दाऊद के किरदार को मकसूद (फरहान) का नाम दिया गया है।

इनमें से ज्यादातर चीजें दस्तावेज में दर्ज हैं, इसलिए स्क्रीनप्ले में कुछ भी चौंकाने वाला नहीं है। कभी-कभी यह भी महसूस होता है कि आप अंधेरे में एक बिंदु से दूसरे स्थान पर आगे बढ़ रहे हैं। अहलूवालिया ने जानबूझकर एक सपाट कथाशैली अपनाई है और वह दर्शकों को अंधेरी गलियों, बदनाम दुनिया की कहानी न्यूनतम नाटकीयकरण के साथ बताते हैं।

नतीजतन, कान भेद देने वाले भावनात्मक विस्फोट और डराने वाले क्षण कम ही हैं। एक बार जब आपकी आंखें चॉल में अजस्ट हो जाती है, जहां गिरोह भूतों की तरह काम करता है और एक लालची, अति महत्वाकांक्षी पुलिस वाला विजयकर नितिन (निशिकांत) उनका पीछा करता है तो आप क्राइम पट्रोल एपिसोड वाली फीलिंग आती है। कलर फ्रेम्स म्यूट हैं और आप पर हावी नहीं होते। इससे पूरी फिल्म में यहां तक कि नृशंस हत्याओं को देखने के दौरान भी आपको तनाव महसूस नहीं होगा। हालांकि, ज्यादातर ऐक्टर फिल्म में अपने संवाद बुदबुदाते नजर आते हैं और इन्हें सुनने के लिए आपको तनाव लेना पड़ता है, यह इरिटेट करने वाला है।

फिल्म का फर्स्ट हाफ गवली का डॉन के रूप में उदय दिखाता है और सेकंड हाफ में गवली की ज़िंदगी, परिवार और उसके पॉलिटिशन बनने पर आधारित है। एक मुस्लिम लड़की ज़ुबैदा (ऐश्वर्या) से शादी करने के कारण गवली की धर्मनिरपेक्ष छवि भी दिखाई गई है हालांकि वह अपनी पत्नी का धर्म परिवर्तन करा कर आशा बना देता है। मुंबई दंगों के दौरान गवली को दोनों धर्मों के लोगों की मदद करने वाला दिखाया गया है। अर्जुन रामपाल ने अरुण गवली की भूमिका बेहतरीन तरीके से अदा की है। फिल्म में अरुण गवली जैसा दिखने के लिए उनकी नाक और माथे में बदलाव किया गया इस कारण अर्जुन के चेहरे में काफी कुछ गवली की छाप दिखती है। अर्जुन की आवाज़ और उनकी डायलॉग डिलिवरी किरदार को और मज़बूत बना देती हैं। अगर आपको क्राइम पर आधारित फिल्में देखना पसंद है तो निश्चित तौर पर यह फिल्म आपके लिए है। गवली इंडियन क्राइम हिस्ट्री का एक बड़ा नाम रहा है और इस फिल्म के जरिए आप उसकी कहानी जान पाएंगे।